तारापुर के चहुँमुखी विकास में शकुनि-सम्राट चौधरी परिवार का उल्लेखनीय योगदान क्या है? ऐसे समझिए

तारापुर के चहुँमुखी विकास में शकुनि-सम्राट चौधरी परिवार का उल्लेखनीय योगदान क्या है? ऐसे समझिए
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

तारापुर के विकास में दिग्गज राजनेता शकुनी चौधरी के परिवार की अहम भूमिका रही है। इनके परिवार ने तारापुर को तीन विधायक, एक कैबिनेट मंत्री और एक मुख्यमंत्री दिया। शकुनि चौधरी के अलावा तारापुर की दिवंगत विधायिका श्रीमती पार्वती देवी हों, या मौजूदा विधायक और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, सबने क्षेत्रवासियों से आत्मीय लगाव बनाये रखा। 

मुख्यतः रूप से इस परिवार का राजनीतिक प्रभाव, सहृदयी व्यवहार, स्थानीय प्रतिनिधित्व के जरिए दीन-दुखियों की सेवा और राजनीतिक दांव-पेंच के बीच खुद को महफूज रखते हुए जातीय-सामाजिक नेटवर्क को मजबूती देना, क्योंकि इसके जरिए ही उन सबकी लोकप्रियता रही है। सच कहूं तो तारापुर को राष्ट्रीय मानचित्र पर चर्चित बनाने की दिशा में उनका योगदान स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।

निज अनुभव और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह परिवार लगभग चार दशक से तारापुर की राजनीति का केंद्र-बिंदु रहा है और क्षेत्र में उनकी सर्वजातीय मजबूत पकड़ ने विकास एजेंडे को नित्य नया मुकाम देते हुए काफी  प्रभावित किया है। विकास पुरूष शकुनि चौधरी के परिवार की राजनीतिक पकड़ की बात करूं तो माननीय पूर्व विधायक शकुनी चौधरी 1985, 1990, 1995, 2000 और 2005 में तारापुर से विधायक रहे, जबकि उनकी धर्मपत्नी पार्वती देवी भी इसी क्षेत्र से विधायक रहीं। 

फिलवक्त उनके दूरदर्शी पुत्र सम्राट चौधरी न केवल स्थानीय विधायक हैं, बल्कि अपनी दृढ़ राजनीतिक सूझबूझ के लिए पूरे देश के अप्रवासी बिहारियों और एनआरआई बिहारियों/भारतीयों के बीच अक्सर चर्चा में रहते आये हैं। इससे तारापुर में बतौर जनप्रतिनिधि इस परिवार की लगातार उपस्थिति बनी रही और स्थानीय सत्ता-संरचना में उसका असर कायम रहा।

स्वाभाविक है कि विकास पर इसका सकारात्मक असर पड़ा। इस लंबे राजनीतिक वर्चस्व की वजह से सड़क, संपर्क, जनसुविधा, प्रशासनिक पहुंच और सरकारी योजनाओं के वितरण जैसे मुद्दों पर परिवार का अमिट प्रभाव रहा। एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि तारापुर में 45 हजार से ज्यादा कुशवाहा वोटों पर इस परिवार का बड़ा असर है, इसलिए विकास से जुड़े स्थानीय निर्णयों में उनकी भूमिका अहम मानी जाती रही। 

यही नहीं, पूरे राज्य और देश की लवकुश राजनीति को शकुनि चौधरी और सम्राट चौधरी ने एक नई पहचान दी, जिसका लाभ राष्ट्रवादी भाजपा को दिल्ली से लेकर बिहार तक मिला। इससे उनकी जन-धारणा और पहचान मजबूत हुई। राजनीतिक गलियारों में तारापुर, मुंगेर को कई लोग शकुनी चौधरी परिवार का गढ़ मानते हैं, और 2021 के उपचुनाव में भी परिवार की “साख” को महत्वपूर्ण बताया गया। 

इससे यह संकेत मिलता है कि परिवार सिर्फ चुनावी शक्ति नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास की राजनीतिक पहचान का भी हिस्सा बन गया था। वहीं, परिवार के देशभक्त राजनीतिक उत्तराधिकार में सम्राट चौधरी का नाम सबसे प्रमुख है। रिपोर्टों के मुताबिक तारापुर से उनके चुनाव लड़ने को परिवार के लिए जमीन से जुड़ाव और राजनीतिक प्रतिष्ठा, दोनों का प्रतीक माना गया, और उनके प्रचार से भी क्षेत्र में विकास और पहचान की बहस जुड़ी रही। 

केंद्रीय गृह मंत्री ने तारापुर वासियों से अनुरोध किया था कि आप इन्हें जिताइये, बड़ा आदमी बनाएंगे। इस प्रकार पहले देवतुल्य मतदाताओं ने और फिर गृह मंत्री अमित शाह ने मतदाताओं को दिया वचन पूरा किया। इससे तारापुर वासियों के सौभाग्य के द्वार खुल गए और पहली बार वीवीआइपी विधानसभा क्षेत्र कहलाने का गौरव मिला।

स्वाभाविक सवाल है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तारापुर के विकास में क्या योगदान दिया? तो दो टूक जवाब होगा कि सम्राट चौधरी ने तारापुर के विकास में मुख्यतः योजनाओं के शिलान्यास, उद्घाटन और विकास-एजेंडा को आगे बढ़ाने के जरिए योगदान दिया है। उपलब्ध खबरों के अनुसार उन्होंने तारापुर में 176.21 करोड़ रुपये की 13 योजनाओं और 17620.90 लाख रुपये की 14 विकास योजनाओं का शिलान्यास/उद्घाटन किया, जो अहम बात है।

## मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रमुख काम

- तारापुर बाईपास पथ, रणगांव-भगलपुरा पथ और अन्य सड़क परियोजनाओं की शुरुआत कराई गई ।
- स्कूल भवन, बस स्टैंड, नगर और सड़क संपर्क जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया।
- 2026 में तारापुर में 38.75 करोड़ रुपये की दर्जनों योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया।
- इससे विकास की दिशा बदली। रिपोर्टों में उनके नेतृत्व में सुल्तानगंज-देवघर फोरलेन, गंगा जल आपूर्ति, उद्योग हब, रिंग रोड और पर्यटन विकास जैसी बड़ी योजनाओं का भी उल्लेख है।

 इससे संकेत मिलता है कि उनका योगदान केवल एक-दो परियोजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि तारापुर को सड़क, पानी, उद्योग और पर्यटन से जोड़ने की दिशा में रहा है।
जहांतक स्थानीय असर की बात है तो तारापुर के लोग उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद विकास को और तेज़ होने की उम्मीद जता रहे हैं। स्थानीय रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि 25 वर्षों से लंबित योजनाओं को अब गति मिलने की संभावना है। 

संक्षेप में, सम्राट चौधरी का योगदान तारापुर में घोषित विकास परियोजनाओं को जमीन पर उतारने, कनेक्टिविटी सुधारने और भविष्य की बड़ी योजनाओं का राजनीतिक-प्रशासनिक आधार बनाने के रूप में दिखता है। जबकि आगे बहुत कुछ होने की उम्मीद जगी है।
तारापुर में प्रस्तावित इंडस्ट्रियल हब से हजारों रोजगार मिलने की उम्मीद है। तारापुर को 256 हेक्टेयर के औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने और बड़े औद्योगिक विस्तार की बात कही गई है, जिससे रोजगार सृजन का दावा किया गया है।

उपलब्ध अनुमान: कुछ रिपोर्टों में बिहार के औद्योगिक विस्तार के संदर्भ में 553 प्रत्यक्ष और 8000 अप्रत्यक्ष रोजगार जैसे आंकड़े दिए गए हैं, लेकिन यह संख्या पूरे एक मेगा प्रोजेक्ट/औद्योगिक क्लस्टर के संदर्भ में बताई गई थी, न कि केवल तारापुर के लिए। दूसरी ओर, तारापुर, असरगंज और संग्रामपुर को मिलाकर उद्योग हब बनाने की योजना का उल्लेख है, जिसमें 5000 एकड़ जमीन पर उद्योग प्रस्तावित है। 

तारापुर के औद्योगिक हब से स्थानीय स्तर पर निर्माण, परिवहन, भंडारण, सप्लाई चेन, छोटे ठेकेदारों और सेवा क्षेत्रों में रोजगार बढ़ने की संभावना है। यानी रोजगार केवल फैक्ट्री कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अप्रत्यक्ष अवसर भी बनेंगे। बताया गया है कि तारापुर, असरगंज और संग्रामपुर को मिलाकर एक औद्योगिक हब बनाया जाएगा, और करीब 5000 एकड़ क्षेत्र में उद्योग बसाने की योजना है।

रिपोर्ट के अनुसार यह हब मुख्यतः लघु और मध्यम उद्योगों के लिए विकसित किया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर निवेश और रोजगार बढ़े। एक संबंधित औद्योगिक स्थान की खबर में सड़क, नाली, जल निकासी, बिजली और जलापूर्ति जैसी आधारभूत सुविधाओं के साथ लगभग 125 लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए जगह तैयार होने की बात भी आई है।

तारापुर जैसे औद्योगिक हब में आम तौर पर वे उद्योग आते हैं जिन्हें जमीन, बिजली, पानी और सड़क संपर्क की जरूरत होती है। इसलिए यहाँ प्रसंस्करण इकाइयाँ, कृषि-आधारित उद्योग, निर्माण सामग्री, हल्की मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और सहायक उद्योग आने की संभावना सबसे अधिक मानी जा सकती है। तारापुर हब में कौन-सा एक विशेष सेक्टर जैसे टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स या फार्मा ही आएगा। 

यानी, अभी यह कहना ज्यादा सही होगा कि योजना बहु-उद्योगीय औद्योगिक क्षेत्र की है, न कि किसी एक उद्योग-विशेष की। तारापुर हब के बारे में सबसे भरोसेमंद निष्कर्ष यही है कि यह छोटे-बड़े मिश्रित उद्योगों के लिए बनाया जा रहा है, और इसका अंतिम उद्योग-मिक्स सरकार की औपचारिक अधिसूचना या प्लान में ही साफ होगा ।


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