बिहार में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने सियासी मायने
बिहार में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने सियासी मायने
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
पहला, नई सम्राट सरकार विकास ने नए प्रतिमान स्थापित करने को प्रतिबद्ध है। इसलिए बिहार में सम्राट कैबिनेट ने अपनी पहली ही बैठक में 11 नए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का जो फैसला किया है, वह संतुलित और समावेशी विकास के दृष्टिगत सोचा-समझा और सधा हुआ कदम है। इस नजरिए प्रस्तावित जगहों की सूची निम्नलिखित है, जिनका शैक्षणिक, औद्योगिक और सांस्कृतिक महत्व है- 1. पटना आईटी टाउनशिप (पटना के आस‑पास) – उच्च‑टेक और आईटी बेल्ट बनाने का लक्ष्य। 2. तिरहुत (मुजफ्फरपुर के पास)– उत्तर बिहार के लिए नया औद्योगिक‑शहरी हब। 3. सारण (छपरा के पास) – पश्चिम बिहार में सुनियोजित शहरी विकास के लिए। 4. विक्रमशिला (भागलपुर के पास)– दक्षिण‑पूर्व बिहार में शैक्षणिक‑पर्यटन‑ऊर्जा मिक्स हब के रूप में विकास।
5. सीतापुरम (सीतामढ़ी के पास बनने वाला नया टाउनशिप) – कोशी क्षेत्र के लिए नया आर्थिक केंद्र। 6. रावतपुर (पटना के पास)– पटना मेट्रोपॉलिटन एरिया के लिए एक और सैटेलाइट शहर। 7. बारा (पटना के पास एक और टाउनशिप) – शहरी विस्तार और मेडिकल‑रियल एस्टेट बेल्ट के लिए।
8. बख्तियारपुर टाउनशिप (पटना के उत्तर में) – नदी‑तट (गंगा) के साथ डिजिटल और आवासीय हब।
9. बोचहां (बेगूसराय–डीएमए क्षेत्र)– पूर्वी बिहार के लिए औद्योगिक व रिहायशी टाउनशिप। 10. किशनगंज टाउनशिप (किशनगंज जिला) – दूरस्थ पूर्वी क्षेत्र में नया शहरी केंद्र।
11. “पटना आईटी टाउनशिप” और “साउथ‑ईस्ट बिहार में एक अन्य टाउनशिप” को अलग‑अलग गिना गया है, जिनके नाम अभी औपचारिक रूप से गोपनीय या अंतिम अनुमोदन प्रक्रिया में बताए जा रहे हैं। यहां पर ध्यान देने वाली बातें यह हैं कि ये सभी टाउनशिप कृषि या खाली जमीन पर नियोजित रूप से बनाए जाएँगे और उन क्षेत्रों में फिलहाल निर्माण और जमीन‑रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई है, ताकि मास्टर प्लान तैयार हो सके।
दूसरा, बिहार सरकार का यह कदम मास्टरस्ट्रोक समझा जा रहा है, क्योंकि इससे इन 11 प्रमुख शहरों में दिल्ली-एनसीआर के नोएडा और गुरुग्राम की तरह विकास का माहौल बनेगा। यह बात महत्वपूर्ण इसलिए है कि इंजीनियर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (अब पूर्व) इस बारे में दो दशकों तक सोच नहीं पाए और कर्मयोगी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी पहली ही कैबिनेट में इस आशय फैसले लेकर बिहारियों के भाग्य बदलने की शुरुआत कर दी।
तीसरा, बिहार वह प्रदेश है जिसके समग्र विकास से पूरी पूर्वी एशिया और पश्चिम एशिया पर भारत के दबदबे को बढ़ाया जा सकता है। लिहाजा अशोक द ग्रेट के बाद सम्राट द ग्रेट के आगामी फैसलों और उसके फलाफल का इंतजार करते रहिए। उद्यमशीलता से भरा बिहार रमणीक बनेगा, बुद्ध की शांति और महावीर की अहिंसा नीति महिमा मंडित होकर लौटेगी। सनातन गौरव शिखर पर पहुंचेगा। बस आमलोग जातिवादी भावना भूलकर अपने नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का साथ दीजिए, ताकि कोई उनकी उड़ती पतंग काटने का दुस्साहस नहीं कर पाए।
चौथा, जिस तरह भाजपा ने अचानक राष्ट्रीय अध्यक्ष दिया है, उसी तरह प्रधानमंत्री पद के दृष्टिगत योगी-शाह की दावेदारी के बीच बिहार को यह महान पद भी अनायास ही मिलेगा, क्योंकि भाजपा के चाणक्य अमित शाह ने अपने चंद्रगुप्त सम्राट चौधरी को बड़ा आदमी बनाते हुए आगे बढ़ा दिया है और शेष कार्य भगवान सत्यनारायण जी पूरा करेंगे, क्योंकि पूरे विश्व के मालिक वही हैं, विश्वदेव हैं और बिहारियों की उद्यमिता और दूरदर्शिता के साथ ऐसा न्याय करेंगे जो सदियों तक याद रहेगा।
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