अक्षय तृतीया के अक्षय सामाजिक विचार, वरिष्ठ पत्रकार कमलेश पांडेय के साथ
@अक्षय तृतीया के अक्षय सामाजिक विचार, वरिष्ठ पत्रकार कमलेश पांडेय के साथ
"राजनैतिकदुनिया" विचार परियोजना एक ऑनलाइन मुहिम है, जिसकी ग्रामीण उत्थान इकाई का पूर्वी बिहार मुख्यालय रहमतपुर बासा, असरगंज, मुंगेर से डिजिटल रूप से चलता है। इसका डिजिटल पता है: व्हाट्सएप- 8586800513, ईमेल: rajnaitikduniya@gmail.com
वहीं, राष्ट्रीय मुख्यालय वैशाली, वसुंधरा, गाजियाबाद, दिल्ली/एनसीआर से संचालित है। इसकी व्यक्तिगत मीटिंग प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, रायसीना रोड, नई दिल्ली में ऑनलाइन रूप से आयोजित होती है। डिजिटल पता है: व्हाट्सएप- 8586800513, ईमेल: rajnaitikduniya@gmail.com
इसके वैचारिक शोध परक रपट को देश-प्रदेश की पत्र-पत्रिकाएं महत्वपूर्ण स्थान देती आई हैं। पुस्तक संपादन/प्रकाशन में भी इसका मुख्य योगदान है। हर गांव/शहर/परिवार का इतिहास संकलन आदि इसकी महत्वपूर्ण परियोजना है। वैसे धार्मिक केंद्रों को बढ़ावा देना, जिससे शिक्षा/स्वास्थ्य/बागवानी को बढ़ावा देकर कुपोषण दूर किया जाए और अंग मगध के प्राचीन गौरव को पुनर्जीवित किया जाए। नालंदा/विक्रमशिला जैसे मशहूर विश्वविद्यालय की उदार चेतनाओं से समाज को जागृत किया जाए। वहीं, विक्रमशिला विवि की विशेषज्ञता तंत्र विद्या से समाज को वैज्ञानिक लाभ मिले।
इसलिए यह नियमित ऑनलाइन कार्यशाला भी आयोजित करता है ताकि इलाके की उभरती हुई प्रतिभाओं को क्षेत्रीय, प्रादेशिक और राष्ट्रीय वैचारिक संसाधन उपलब्ध करवा सके, क्योंकि सकारात्मक बुद्धि/विचार ही सफलता की जननी है। फिर भौतिक संसाधन खुद ब खुद जुटते चले जाते हैं।
सच्चे सपनों को, नेक विचार को प्रकृति और महापुरुष का भी सहयोग मिलता है। इसके स्वप्नद्रष्टा भी यहीं के उपज हैं और एक वैचारिक शख्सियत के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मशहूर हैं। अपनी जन्मभूमि/कर्मभूमि के समग्र विकास हेतु सृजनात्मक योगदान देना ही उनकी आत्मिक पहचान है जो किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं।
इसलिए यदि आपके भी दिलोदिमाग में पूर्वी बिहार, सम्पूर्ण बिहार और पूर्वी भारत के विकास में वैचारिक योगदान देने की ललक है। तथ्यात्मक और शोधपरक आलेख लिख सकते हैं। वहां के बच्चों में, युवाओं में विकास और उद्यमिता की ऑनलाइन ललक जगा सकते हैं। विकास के बुद्धि जागृत करने के बाद व्यवसायिक, प्रशासनिक और सामाजिक तालमेल बिठा सकते हैं। तो व्हाट्सएप- 8586800513 पर जुड़िए। rajnaitikduniya@gmail.com पर आंकड़े ईमेल कीजिए।
ध्यान दें, यह कोई रोजगार नहीं बल्कि सामाजिक प्रेरणा का उदारवादी अभियान है जो स्ववित्त पोषित है और सफल पेशेवर होना इसकी पहली शर्त है, भले ही आप किसान या दुकानदार ही क्यों न हों।
प्रस्तावित प्रारूप: इलाके की सरकारी योजनाओं के समानांतर अनुमन्य निजी योजनाओं को साकार करवाना। नई नई सोच पर आधारित स्टार्टअप को आगे बढ़वाना। इस दृष्टि से व्यक्तिगत फर्म, कम्पनी, एनजीओ, ट्रस्ट आदि का गठन जरूरी होता है।
वहीं, ऑनलाइन/ऑफलाइन पुस्तक, अनियतकालीन पत्रिका, स्मारिका का प्रकाशन किया जाता है ताकि आमलोगों को विभिन्न प्रकार की उपयोगी जानकारी मिलती रहे। क्षेत्रीय, प्रादेशिक और राष्ट्रीय स्तर पर उसका प्रकाशन होता रहे।
नमूने के उदाहरण: धान, गेहूँ, दलहन कृषि उत्पाद, सब्जी/फल बागवानी उत्पाद, हस्तकला उत्पाद, वस्त्र उत्पाद, शैक्षणिक उत्पाद, वन्य उत्पाद, जलीय उत्पाद, जैसे हजारों चीजों की निर्माण, विपणन और उपभोक्ताओं से जुड़े कार्यों में नई दृष्टि पैदा करना चुनौती तो है, लेकिन प्रतिस्पर्धा मुक्त कारोबार को बढ़ावा देती है। आप सफल हों, दूसरों को सफल बनाने में मदद करें, यह पूण्य कार्य है।
खासतौर पर दलितों, महादलितों, पिछड़ों, अत्यंत पिछड़ों, पददलित गरीब सामान्य जातियों, पसमांदा समाज के युवाओं/महिलाओं/किसानों/कारीगरों/मेहनती लोगों की यदि आप उदार हृदय से बौद्धिक सेवा कर सकते हैं तो इस मिशन से जुडें।
याद रखें, ज्ञान दान महाअभियान होता है। यह अन्न दान से बेहतर है। शिक्षा दान के समतुल्य है। इसलिए रविवार को सिर्फ दो घण्टे अपने आसपास दें। मंदिर/मस्जिद आदि सार्वजनिक जगहों से शांति और समृद्धि के सूत्र बांटें।
याद रखें, जब समाज सुखी होगा, तभी आप भी आनंदित रह पाएंगे। कमलेश पांडेय का जीवनदर्शन सबसे बड़ा उदाहरण और उपलब्धि है। साध्य कठिन हो, साधन चाहे स्वल्प, पूर्ण करेगा वह मेरा संकल्प ही जिनका मूलमंत्र है। उन्होंने समाज से जो लिया है, वह चुकाने के लिए निज खर्चे पर यह सब करते आये हैं, जिसका आर्थिक व्यय राजबनैली स्टेट, सुलतानगंज के तहसीलदार रहे बाबू सूर्य नारायण सिंह, बाबू शिवशंकर प्रसाद सिंह, बाबू हरिप्रसाद सिंह, बाबू श्री कृष्ण सिंह, और बिहार सरकार की अवकाश प्राप्त प्रधानाचार्या, उत्क्रमित मध्य विद्यालय, चाफ़ा के सहयोग से और असमय दिवंगत बाल प्रतिभा ओमप्रकाश पांडेय (जन्म: 24-12-1984, मृत्यु: 08-05-1997) की पुण्य स्मृति में गठित अपंजीकृत ट्रस्ट से 'गोपनीयता' पूर्वक चलाया जाता है, क्योंकि प्राप्त संस्कार के मुताबिक, सामाजिक दान वह है जो लेने वाले और देने वाले के अतिरिक्त किसी को पता न चले और न फोटो सेशन हो। इस दान का उद्देश्य जनकल्याण होता है, दिखावा नहीं। पहले राजपरिवार से जुड़े लोगों में यही संस्कार होता था।
हमारी राजमाता तुल्य नानी त्रय श्री मती जानकी देवी/श्री मतीरामदुलारी देवी/श्रीमती चन्द्रमुखा देवी की यही सीख बचपन से मुझे मिली है। यदि आप भी अपने अपने पूर्वजों की स्मृति में अपने निकटस्थ समाज के लिए कुछ कर सकें तो आपका सौभाग्य उदित होगा। ऐसे लोगों को मेरी पराविद्या शिक्षा मुक्त दी जाती है।
इस पुण्यभूमि ने जमींदारों, मशहूर जजों, वकीलों, ब्यूरोक्रेट्स, शिक्षा विद, कुलपति, पत्रकार, उद्यमियों के अलावा शीर्षस्थ उपलब्धि के रूप में पूर्व पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री श्रीमती कौशल्या देवी (जनता पार्टी, रामसुंदर दास सरकार) जैसी शख्सियत दी, पूर्व कुलपति, नालंदा खुला विश्वविद्यालय, पटना प्रो डॉ ऊषा सिंह, जैसे अनगिनत हमारे मेंटर दिए, जो उस जमाने में महिला सशक्तिकरण की प्रतीक बनीं, जिन्होंने इन सपनों को पैदा किया।
वहीं, शिवनंदन प्रसाद सिंह, विद्वान अधिवक्ता हरिश्चंद्र सिंह, डॉ अमर कुमार सिंह, डिलीट, संजीव सिंह, रिटायर्ड डीएसपी, बिहार पुलिस, न्यायलय पेशकार पुरुषोत्तम कुमार सिंह, समाजसेवी ध्रुव कुमार सिंह, जैसा समाजसेवी पैदा किया, जिन जैसे लोगों ने अपनी छत्रछाया में मेरे जैसी प्रतिभा को बालसुलभ छत्रछाया देकर आगे बढ़ाया, बिना किसी निजी स्वार्थ के। सबका एक ही सपना रहा है, घर परिवार के अलावा देश समाज के लिए अपने हिस्से का योगदान देते रहो।
यही वजह है कि राजनैतिक दुनिया विचार परियोजना के अंग विकास प्रकोष्ठ/परिषद के राष्ट्रीय संयोजक और वरिष्ठ पत्रकार कमलेश पांडेय का मानना है कि पूर्वी भारत और सम्पूर्ण बिहार के विकास से जुड़े सपनों को साकार करने के लिए अंग क्षेत्र का सम्पूर्ण विकास जरूरी है।
प्रथम चरण में भागलपुर, मुंगेर और बांका के संयुक्त औद्योगिक विकास के लिए स्थानीय संसाधनों जैसे सिल्क, डेयरी, रक्षा उत्पादन और खनिजों पर आधारित रणनीति अपनानी चाहिए। इस हेतु आर्थिक रूप से बुनियादी ढांचे का विकास और सामरिक रूप से रक्षा-रेल हब पर फोकस लाभकारी होगा।
यदि स्थानीय संसाधन को रणनीतिक रूप से पीपीपी की भागीदारी से विकसित किया जाए तो यह महत्वपूर्ण निर्णय होगा।
इस निमित्त भागलपुर में भागलपुरी सिल्क उद्योग को मजबूत करें, जो 100 करोड़ का कारोबार करता है और 1 लाख बुनकरों को रोजगार देता है; निर्यात बढ़ाने के लिए ODOP योजना का विस्तार करें।
इसी प्रकार मुंगेर में आयुध कारखाना और जमालपुर लोकोमोटिव वर्कशॉप का आधुनिकीकरण करें, जहां हाई-पावर डीजल इंजन निर्माण फिर शुरू हो रहा है।
वहीं, बांका में खनिज (गैलेना) और कृषि संसाधनों पर आधारित प्रसंस्करण इकाइयां लगाएं।
वहीं, आर्थिक उपाय के तहत संयुक्त औद्योगिक पार्क विकसित करें। बांका में 200 एकड़ और मुंगेर में 50 एकड़ जमीन पहले ही हस्तांतरित हो चुकी है। डेयरी हब बनाना भी महत्वपूर्ण होगा। जमालपुर में 250 करोड़ की मदर डेयरी यूनिट से इन जिलों के किसानों को लाभ होगा।
इस हेतु कनेक्टिविटी सुधारने की पहल होनी चाहिए। भागलपुर-जमालपुर रेल लाइन और मोकामा-मुंगेर 4-लेन हाईवे से माल ढुलाई आसान होगी।
बिहार की सुरक्षा के लिए सामरिक उपाय किए जाने की जरूरत है, क्योंकि नेपाल से ज्यादा बंगलादेश को ग्रेटर बनाने के सपनों से खतरा सम्भावित है। इससे निबटने के लिए रक्षा कॉरिडोर एकीकृत करना समय की मांग है।
मुंगेर के आयुध कारखानों को बांका-भागलपुर से जोड़ें, और नया कारखाना भी प्रस्तावित है। वहीं, गंगा जलमार्ग उपयोग को बढ़ावा दें।
भागलपुर बंदरगाह से खनिज निर्यात बढ़ाएं, सामरिक रूप से पूर्वोत्तर से जुड़ाव मजबूत करें।
वहीं, कौशल विकास के लिए स्थानीय युवाओं को ITI में रक्षा-टेक्सटाइल प्रशिक्षण दें, बिहार औद्योगिक नीति 2016 के तहत प्रोत्साहन लें। (क्रमशः) हर मुद्दे पर बात होगी, इसलिए इस पेज से जुड़े रहें।
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