आखिर लोकसभा-विधानसभा जैसे निर्वाची निकायों में एससी-एसटी की तरह कब से लागू होगा ओबीसी-ईडब्ल्यूएस आरक्षण?

आखिर लोकसभा-विधानसभा जैसे निर्वाची निकायों में एससी-एसटी की तरह कब से लागू होगा ओबीसी-ईडब्ल्यूएस आरक्षण?
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

भारत में लोकसभा, विधानसभा, राज्यसभा और विधानपरिषद के सदस्यों के लिए होने वाले चुनावों में अभी तक ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) और गरीब सवर्णों (पददलित सामान्य जातियों) को दलित-आदिवासियों (एससी-एसटी) की तरह आरक्षण प्राप्त नहीं है! लिहाजा आगामी परिसीमन (जून 2026) में इस मुद्दे को भी शामिल किया जाना चाहिए। बताया गया है कि महिलाओं को मिलने वाला 33 प्रतिशत आरक्षण भी उनके कोटे के भीतर ही दिये जाने की योजना है। 

अपुष्ट खबर मिली है कि सरकारी रणनीतिकारों की योजना भी कुछ ऐसी ही है जिसमें राजनीतिक दबाव वश कुछ फेरबदल भी संभव है।पड़ने वाले बताया जाता है कि आगामी परिसीमन के बाद ओबीसी (OBC) और गरीब सवर्णों (EWS) के लिए यह लागू होगा। यहां पर एक अहम सवाल और है। वह यह कि दलितों के भीतर महादलितों और ओबीसी के भीतर ईबीसी/एमबीसी, और आदिवासियों के भीतर धर्मांतरित आदिवासियों सहित सबके लिए क्रीमीलेयर वाला प्रावधान भी अविलम्ब लागू किया जाए। 

बेहतर तो यह होगा कि इनकी जातीय रोटेशनल चार्ट घटती कुल आबादी के अनुरूप बनाकर आरक्षण की भावना को व्यवहारिक अमलीजामा पहनाएं।अन्यथा इनके भीतर भी कुछ ही लोगों को फायदा मिलेगा।यही वजह है कि आरक्षण का पवित्र मुद्दा अब राजनीतिक गोलबंदी में घिरकर हांफने लगा है। बता दें कि दलितों और आदिवासियों को लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, विधानपरिषद जैसे निर्वाची निकायों में लगभग 24 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है। लेकिन ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत और गरीब सामान्य जातियों (पददलित सवर्णों) के लिए 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित किये जाने हेतु लोगों की मांग विचाराधीन है और उम्मीद है कि आगामी परिसीमन आयोग (जून 2026) के गठन के बाद आरक्षण की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। 

बता दें कि ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 के तहत लागू है। जबकि राज्यसभा और विधानपरिषद (जहां मौजूद हो) में भी राज्य-स्तरीय ओबीसी (OBC) सूचियों के आधार पर आरक्षण है, जो 2021 के 105वें संशोधन से राज्यों को सूची बनाने का अधिकार मिलने के बाद मजबूत हुआ। यह 1992 के इंदिरा साहनी मामले से 50% सीमा के भीतर है।
वहीं, गरीब सवर्णों (EWS) के लिए 10% आरक्षण 2019 के 103वें संशोधन (अनुच्छेद 15(6) और 16(6)) से नौकरियों और शिक्षा में मिला, लेकिन विधायी निकायों में यह अभी लागू नहीं है। बताया जाता है कि परिसीमन आयोग (2026 तक) के बाद 2028-29 के लोकसभा/विधानसभा चुनावों से लागू होगा, क्योंकि संरक्षण अनुसूची में बदलाव जरूरी है। वहीं, राज्यसभा/विधानपरिषद में राज्य-विशेष नीति पर यह निर्भर करेगा।

ऐसे में स्वाभाविक सवाल है कि आखिर में यह कब और कैसे लागू होगा? तो जवाब होगा कि परिसीमन 2026 तक पूरा होने पर OBC/EWS कोटे वाले सीटें तय होंगी, जो आम चुनाव 2029 और उसके बाद होने वाले अन्य विस चुनावों से प्रभावी होंगी। वहीं, राज्यसभा/विधान परिषद में राज्य विधायकों द्वारा नामांकन/चुनाव पर लागू होगा। चूंकि बिहार जैसे राज्यों में 50% से अधिक की मांगें लंबित हैं, जो कि सुप्रीम कोर्ट की 50% सीमा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होंगी। उल्लेखनीय है कि परिसीमन आयोग ओबीसी (OBC) और ईडब्ल्यूएस (EWS) आरक्षण को सीधे तौर पर नहीं बदलता, बल्कि यह लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों का पुनर्वितरण करता है, जिसमें OBC के लिए 27% और EWS कोटा पहले से लागू है।

जहां तक परिसीमन की समयरेखा की बात है तो परिसीमन आयोग जून 2026 तक गठित हो सकता है और 2011 जनगणना के आधार पर सीटें बढ़ाएगा। जैसे- SC/ST कोटे में वृद्धि जैसे 84 से 136 SC सीटें मिलेंगी। वहीं, OBC आरक्षण का निर्धारण राज्यवार 'ट्रिपल टेस्ट' (पिछड़ापन, पर्याप्त प्रतिनिधित्व की कमी, डेटा) से होता है, जो परिसीमन के बाद स्थानीय/राज्य आयोग तय करेंगे।
इससे OBC आरक्षण पर प्रभाव पड़ेगा। 2029 के आम चुनावों से नए परिसीमन प्रभावी होंगे, लेकिन OBC कोटा वर्तमान 27% ही रहेगा जब तक संवैधानिक संशोधन या अदालती फैसला न हो। चूंकि पंचायत/स्थानीय निकायों में OBC आरक्षण परिसीमन से पहले डेडिकेटेड आयोग तय करेगा, जो सुप्रीम कोर्ट के 50% वाले कैप के अधीन रहेगा। वहीं, राज्यसभा/विधानपरिषद में OBC सूची पर निर्भर करेगा, और परिसीमन का सीधा असर नहीं होगा।

उल्लेखनीय है कि परिसीमन आयोग OBC कोटे को सीधे प्रतिशत (27%) के रूप में नहीं बदलता, लेकिन लोकसभा और विधानसभाओं में कुल सीटों की संख्या बढ़ाने से OBC आरक्षित सीटों की कुल संख्या बढ़ सकती है। यही बात EWS कोटे पर भी लागू होती है, जिसके लिए 10 प्रतिशत आरक्षण अनुमन्य है। जहां तक परिसीमन का OBC व EWS पर पड़ने वाले प्रभाव की बात है तो 
परिसीमन मुख्यतः SC/ST के लिए आरक्षित सीटें जनसंख्या अनुपात (2011 जनगणना) से तय करता है, जबकि OBC कोटा राज्यवार 'ट्रिपल टेस्ट' (पिछड़ापन, अपर्याप्त प्रतिनिधित्व, डेटा) से राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग निर्धारित करते हैं। 

ऐसे में यदि लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 850 हों, तो OBC की 27% सीटें अनुपातिक रूप से बढ़ेंगी (लगभग 146 से 230), लेकिन 50% कुल आरक्षण सीमा (SC/ST/OBC) का पालन जरूरी है। इसलिए EWS को अतिरिक्त 10 प्रतिशत आरक्षण अनुमन्य प्रावधानों के मुताबिक ही दिए जा सकते हैं।

जहां तक समयरेखा और चुनौतियां की बात है तो 2026 तक परिसीमन पूरा होने पर 2029 चुनावों से लागू होगा। वहीं OBC सब-कोटा (जैसे महिलाओं में) की मांग लंबित है। सुप्रीम कोर्ट की 50% कैप और डेटा की कमी से राज्य-स्तरीय विवाद संभव है। जबकि राज्यसभा/विधानपरिषद अप्रत्यक्ष चुनाव पर निर्भर है, इसलिए इसपर सीधा असर कमहोगा।

स्मरण रहे कि पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट के माध्यम से लागू होता है, जो स्थानीय निकायों के लिए अनिवार्य है। इस ट्रिपल टेस्ट के तीन चरण हैं- पहला, राज्य सरकार समर्पित आयोग गठित करती है जो पंचायतवार OBC की आबादी, शैक्षिक-आर्थिक पिछड़ापन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का डेटा एकत्र करता है। दूसरा, आयोग रिपोर्ट में प्रत्येक पंचायत/वार्ड के लिए OBC आरक्षण प्रतिशत सुझाता है, जो वर्तमान पिछड़ापन पर आधारित होता है। तीसरा, कुल आरक्षण (SC/ST/OBC) 50% से अधिक न हो; अधिसूचना जारी होने के बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू होती है। 

इस प्रकार ट्रिपल टेस्ट पूरा होने पर राज्य निर्वाचन आयोग आरक्षित सीटें घुमाकर अधिसूचना जारी करता है, अन्यथा हाईकोर्ट रोक लगा सकता है। झारखंड/यूपी जैसे राज्यों में 2026-27 चुनावों से पहले आयोग सर्वे कर रहे हैं। डेटा की कमी से देरी संभव है।

लोकसभा और विधानसभाओं में OBC को 27% आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 330D और 332(6) के तहत 1992 के इंदिरा साहनी फैसले से लागू है, जो प्रत्यक्ष चुनावी सीटों पर राज्यवार OBC सूचियों के आधार पर आरक्षित होता है। यह SC/ST कोटे के साथ कुल 50% सीमा में रहता है, और 2024 चुनावों में भी यही प्रक्रिया चली है। जबकि राज्यों को 105वें संशोधन (2021) से OBC सूची निर्धारित करने का अधिकार है।

हां, भ्रम का कारण ट्रिपल टेस्ट है जो मुख्यतः पंचायत/नगर निकाय जैसे स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अनिवार्य है, न कि लोकसभा/विधानसभा के लिए। लोकसभा में परिसीमन के बाद (2029 से) कुल सीटें बढ़ने पर OBC आरक्षित सीटों की संख्या अनुपातिक रूप से बढ़ेगी, लेकिन प्रतिशत (27%) वही रहेगा। जबकि EWS कोटा (10%) अभी विधायी सीटों पर लागू नहीं है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के कूटनीतिक निहितार्थ

जनहितैषी सुझाव को शिकायत समझने की भूल न करें, अपेक्षित बदलाव के वाहक बनें

शिक्षक दिवस: जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने स्कूलों का औचक निरीक्षण किया और बाल बाटिका का महत्व समझाया