प्रतिकूल परिस्थितियों में लंबी प्रतीक्षा नहीं बल्कि अन्तःकरण की आवाज सुनकर अविलंब पहल करें : डीएम डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस

प्रतिकूल परिस्थितियों में लंबी प्रतीक्षा नहीं करें, अपने अन्तःकरण की आवाज सुनकर अविलंब पहल करें : डीएम डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस
जौनपुर, उत्तरप्रदेश। स्थानीय जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस ने गत शुक्रवार (3 अप्रैल) को शासकीय कार्यों के भ्रमण/पर्यवेक्षण के दौरान तहसील मड़ियांव के विभिन्न क्षेत्रों अंतर्गत पूल निर्माण कार्य, फार्मर रजिस्ट्री कार्य, सीएससी और अन्य प्रशासनिक कार्यों का औचक निरीक्षण करते हुए जायजा लिया। इसी क्रम में उन्होंने लोगों को एक संदेश देते हुए कर्तव्यनिष्ठ लोगों को अंगवस्त्र व मिठाई देकर सम्मानित करके उन सबका उत्साह बर्द्धन किया। 
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, डीएम डॉ सिंह ने सर्वप्रथम  बाबतपुर स्थित नवनिर्मित विशालकाय हनुमान जी का दर्शन करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। ततपश्चात फार्मर रजिस्ट्री के कार्य का जायजा स्थानीय सीएससी में जाकर लिया, जिसका कुशलतापूर्वक संचालन एक दिव्यांग व्यक्ति के द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से बातचीत करने के बाद उस दिव्यांग व्यक्ति से बातचीत की और उनके कार्यों के महत्व के दृष्टिगत उन्हें सम्मानित किया।
इसी बीच उन्होंने आंधी-वर्षा-तूफान का भी सामना किया और वृक्ष गिरने से बंद हुए एक मार्ग को जनसहयोग से क्लियर करवाया। उनके इस जनहितकारी प्रयास का लोगों ने भूरि भूरि प्रशंसा की और तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। डीएम डॉ सिंह के मुताबिक, जैसे ही आंधियां संयमित हुईं, वर्षा कम हुई और तूफान रुका। मैं अपने गंतव्य की ओर ब्रिज निरीक्षण हेतु प्रस्थान किया। 
हालांकि, कुछ दूर आगे बढ़ने पर मड़ियांव तहसील के जमालापुर से बाबतपुर रोड पर एक पुराना वृक्ष मार्ग पर गिरा पड़ा था। अवरुद्ध मार्ग के दोनों ओर सैकड़ों गाड़ियां खड़ी थीं। महिलाएं व बच्चे भी उसमें फंसे पड़े थे। तब मैंने सोचा कि यदि हम प्रतीक्षा करेंगे तो काफी दिक्कत होगी। महिलाओं-पुरुषों और बच्चों को भी परेशानी होगी। इसलिए सामूहिक प्रयत्न किए जाएं।
उसी समय मुझे राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की एक कालजयी रचना की याद आ गई, जिससे उपर्युक्त यशस्वी कार्य का संपादन संभव हो पाया। कविता का अंश है- सच है विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलती है, शूरमा नहीं विचलित होते, पल एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, कांटों में भी राह बनाते हैं! ...है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में, खम ठोंक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पांव उखड़, मानव जब जोर लगाता है, तो पत्थर पानी बन जाता है! 
दरअसल, यह न तो मेरा अहंकार है और न ही मेरा स्वाभिमान है, बल्कि यह मेरे सामूहिक प्रयास का एक तकाजा है कि यदि हमलोग समवेत कोशिश करें तो इस भारी भरकम वृक्ष को हटा सकते हैं। फिर हर हर महादेव और बजरंगबली के जयकारे लगाकर वृक्ष सड़क से हटाया गया। इस कार्य में सर्वाधिक मेहनत करने वाले एक मजदूर को बेनी राम की इमरती और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। इस कार्य को मैंने आपलोगों से इसलिए साझा किया कि प्रतिकूल परिस्थितियों में लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपने अंतःकरण से,अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर त्वरित पहल करनी चाहिए।
ऐसा करते हुए डॉ सिंह ने आज उपर्युक्त मुख्य मार्ग पर अवरोधक बने वृक्ष को सामूहिक प्रयत्न से खाली करवाया, जो आंधी-तूफान के दौरान गिरे एक वृक्ष से जाम हो गया था। उसके दोनों ओर गाड़ियों की कतार खड़ी पड़ी थी और इसी बीच जिलाधिकारी का काफिला भी वहाँ पहुंचा। फिर वो वाहन से उतरकर मौके का जायजा लिया और अपने त्वरित निर्णय से राह में फंसे लोगों के लिए तारणहार बन गए।
ततपश्चात डीएम सिंह ने इस ब्रिज का निरीक्षण किया, जिसके बनने से 50 गांवों के लोगों को फायदा मिलेगा।
अपने संदेश में उन्होंने कहा कि आंधियां आएंगी, तूफान आएंगे, लेकिन जब कोई व्यक्ति प्रतिकूल परिस्थितियों में संयम और धैर्य से सबका साथ लेकर किसी भी कार्य को करेगा तो उसे पूर्ण किया जा सकता है।

इसलिए हमें इस बात का भी आकलन करना चाहिए, कि जिस कार्य को हमलोग सबके साथ मिलकर कर सकते हैं, तो उसे अवश्य करना चाहिए। जब आप सटीक निर्णय लेंगे तो कार्य अवश्य। इसलिए हमलोग सामूहिक भाव से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में कार्य करें। जब हमारे मन के भाव अच्छे होंगे तो सबकुछ अच्छा होकर रहेगा।

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