योगी आदित्यनाथ की विदेश यात्रा से विकास और हिंदुत्व मॉडल हुआ मजबूत!
योगी आदित्यनाथ की विदेश यात्रा से विकास और हिंदुत्व मॉडल हुआ मजबूत!
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री और फायरब्रांड हिन्दू नेता योगी आदित्यनाथ की हालिया सिंगापुर-जापान यात्रा प्रदेश की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को मजबूत करने का एक सशक्त प्रयास है। भले ही सीएम का यह दौरा निवेश आकर्षण और औद्योगिक साझेदारी पर केंद्रित रहा। लेकिन इन दौरों से इस बात के स्पष्ट संकेत मिले कि विकास और हिंदुत्व के मॉडल पर गतिशील यूपी सरकार के लिए निकट भविष्य में 1 ट्रिलियन डॉलर की सूबाई इकॉनमी वाले लक्ष्य को पाना बिल्कुल कठिन नहीं है।
आर्थिक विश्लेषक बता रहे हैं कि जिस तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सहयोगी उपमुख्यमंत्री और भरोसेमंद मंत्रियों के साथ 22 से 26 फरवरी 2026 तक चार दिवसीय विदेश यात्रा पर रहे, उसका अपना महत्व है।सर्वप्रथम उन्होंने 23-24 फरवरी को सिंगापुर की यात्रा की और फिर 25-26 फरवरी को जापान की यात्रा किए।इन दोनों यात्राओं से उन्हें अभूतपूर्व अनुभव हासिल हुआ, जिसके कुछ पलों को उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा भी किया था। कहना न होगा कि 2017 में यूपी की कमान थामने के बाद उनका यह पहला आधिकारिक विदेश दौरा था, जहां उन्होंने निवेशकों, उद्योग प्रतिनिधियों और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात की।
इसलिए योगी की इस विदेश यात्रा के अपने सूबाई मायने हैं, जिसे समझने की जरूरत है। पहला, यह यात्रा यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देगी, विशेषकर अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, डेटा सेंटर और कौशल विकास में निवेश पर फोकस के साथ। दूसरा, सिंगापुर-जापान जैसे औद्योगिक केंद्रों से साझेदारी प्रदेश को 'मेक इन यूपी' हब बनाने में मदद करेगी, जो राज्य की वैश्विक ब्रांडिंग को मजबूत करेगी। तीसरा, योगी आदित्यनाथ की सिंगापुर-जापान यात्रा से उत्तर प्रदेश को कुल 2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 1.5 लाख करोड़ रुपये के एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सिंगापुर से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें 60 हजार करोड़ के एमओयू शामिल हैं। वहीं, जापान से अतिरिक्त निवेश प्रतिबद्धताएं आईं हैं, जो कुल को 2.5 लाख करोड़ तक ले गईं। इन निवेश प्रस्तावों में सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, ऑटोमोटिव, कृषि मशीनरी, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन हाइड्रोजन और एविएशन (एमआरओ) जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है। वो भी नामचीन कंपनियों, जैसे- कुबोटा, स्पार्क मिंडा, सुजुकी, होंडा और मित्सुई यदि से, जिनकी अपनी वैश्विक कारोबारी साख है।
जानकारों के मुताबिक, यदि सरकार इन प्रस्तावों को तय समयसीमा में धरातल पर उतारने का लक्ष्य रखती है, और अपने मकसद में कामयाब होती है तो उत्तरप्रदेश में लाखों रोजगार सृजित होंगे और सूबे के 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को महत्वपूर्ण गति मिलेगी। खास बात यह कि योगी आदित्यनाथ की सिंगापुर-जापान यात्रा ने भाजपा को विकास और हिंदुत्व के मॉडल को मजबूत करने का मौका दिया है।
राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि मुख्यमंत्री का यह दौरा 2027 विधानसभा चुनावों में योगी सरकार की छवि को चमकाने का साधन बनेगा। तभी तो उनका यह दौरा आगामी चुनावों से पहले योगी सरकार की विकास-केंद्रित छवि को रेखांकित करता है। वहीं विपक्ष के सवालों के बावजूद निवेश कूटनीति को बढ़ावा देता है। इससे यूपी की अर्थव्यवस्था को ग्लोबल पटल पर मजबूती मिलेगी। यात्रा से प्राप्त 2.5 लाख करोड़ निवेश प्रस्तावों को भाजपा 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य से जोड़कर प्रचारित करेगी, जो युवाओं में रोजगार सृजन का वादा मजबूत करेगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद ने योगी की वैश्विक अपील बढ़ाई, जो 2027 चुनावों में वोटबैंक को एकजुट करने में सहायक होगा। सच कहा जाए तो योगी का यह दौरा यूपी को ग्लोबल इकोनॉमी में स्थापित करेगा, जो केंद्र में भाजपा की नीतियों को समर्थन देगा। वहीं, हिंदुत्व एंगल (जैसे जापान मंदिर दर्शन) ने सांस्कृतिक डिप्लोमेसी को जोड़ा है, जो पार्टी की वैचारिक मजबूती बढ़ाएगा।
यह बात दीगर है कि सूबे की मुख्य विपक्षी पार्टी सपा के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी की इस अभूतपूर्व यात्रा पर तंज कसा, और इसे 'भारत छोड़कर भागना' बताकर विपक्षी हमला बोला। यह उनकी बचकाना सियासी हरकत है, इससे ज्यादा कुछ नहीं। वास्तव में, निवेश सफलता ने विपक्ष के आरोपों को कमजोर किया, और भाजपा को योगी आदित्यनाथ को प्रदेश में 'विकास पुरुष' के रूप में पेश करने का आधार दिया, जिसका अपना राजनीतिक महत्व है।
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