मकर संक्रांति की शुभकामनाएं, जनसेवा और समरसता का भाव धारण करें, दान करें

मकर संक्रांति की शुभकामनाएं, जनसेवा और समरसता का भाव धारण करें, दान करें
@ दिनेश चंद्र सिंह, जिला मजिस्ट्रेट, जौनपुर जनपद, यूपी

सनातन संस्कृति में मकर संक्रांति को दान-पुण्य का महापर्व माना गया है। वस्तुतः यह पर्व भगवान भास्कर यानी सूर्यदेव के उत्तरायण होने का प्रतीक है। चूंकि सनातनी शास्त्रों में उत्तरायण काल को देवताओं का समय कहा गया है, इसलिए इस अवधि में किए गए पुण्य कर्म अक्षय फल प्रदान करते हैं। इस प्रकार से मकर संक्रांति का दिन आत्म-शुद्धि, करुणा और सेवा भाव को जाग्रत करने का श्रेष्ठ अवसर है। इसलिये इस पावन तिथि पर सूर्यदेव की उपासना, स्नान, जप-तप और दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। मेरा मानना है कि मकर संक्रांति पर जनसेवा, समरसता और आत्मसंयम धारण करके सबकुछ पाया जा सकता है, क्योंकि समस्त दान कर्म, दया  धर्म इसी से अभिप्रेरित होंगे।
जैसा किज शास्त्रों में कहा गया है कि "अन्नदान महादान है।" चूंकि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान कई गुना फल देता है। इसलिए मान्यता है कि इस दिन किया गया छोटा-सा दान भी व्यक्ति के कर्मों को शुद्ध कर उसे पुण्य और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है। विशेष रूप से तिल और गुड़ से बना भोजन दान करने से जीवन में शांति और समृद्धि का संचार होता है। सनातन परंपरा में इस पावन दिन पर अन्नदान को सर्वोत्तम सेवा माना गया है, क्योंकि भूखे को भोजन कराना स्वयं नारायण की सेवा के समान है। वैसे आप विद्या दान भी कर सकते हैं। आप जिस भी क्षेत्र में हैं, उसी में कल्याणकारी सेवा प्रदान करके मानव सभ्यता का उद्धार कर सकते हैं।
मकरसंक्रांति जैसा पर्व अत्यंत शुभ दिवस है। इस पावन पर्व पर सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं। भगवान सूर्यदेव आपके जीवन में एक नई ऊर्जा, नई उमंग, साहस, शौर्य और पराक्रम का ऐसा भाव का उन्मेष करे जो सामाजिक समरसता, अहंकार, मोह, लोभ से त्याग और दान की प्रवृत्ति के माध्यम से समाजसेवा में करूणा और परोपकार की भावना को जागृत करने वाला हो। आप जानते हैं कि आज मकर संक्रांति का त्यौहार है। भगवान सूर्यदेव की आज उत्तरायण यात्रा शुरू हुई है और भगवान सूर्यदेव की उत्तरायण यात्रा  सभी मांगलिक कार्यों के शुरुआत का एक प्रतीक बनकर हमारी भारतीय सनातन संस्कृति का एक ऐसा भाव जागृत करता है, जिसके आधार पर हम जनसेवा के प्रति, सामाजिक सेवा के प्रति और जो अधिकारी व कर्मचारी हैं, वह शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन के साथ अपने जीवन में पुण्य लाभ कमा सकते हैं।

मकरसंक्रांति के आराध्य भगवान सूर्यदेव की महिमा ऋग्वेद में भी वर्णित है- "तरणिर्विश्वदर्शतो ज्योतिष्कृदसि सूर्य। विश्वमा भासि रोचनम्।।" (ऋग्वेद, १/५०/४)। अर्थात ''सम्पूर्ण संसार में एकमात्र दर्शनीय हैं सूर्यदेव! आप सभी साधकों का उद्धार करने वाले, प्रकाशक हैं तथा विशाल अंतरिक्ष को सभी ओर से प्रकाशित करते हैं।'' आगे लिखा गया है- "प्रत्यङ् देवानां विशः प्रत्युद्देषि मानुषान् प्रत्यङ् विश्व स्वदृशे।।" (ऋग्वेद, १/५०/५)। अर्थात "हे सूर्यदेव! आप नियमित रूप से मनुष्यों, देवताओं और मरूगणों के समक्ष उदय होते हैं, जिससे तीनों लोकों में निवास करने वाले आपके दर्शन कर सकें।" ऐसे महान भगवान् सूर्यदेव ! आपको बारंबार प्रणाम है।

इसलिए आज का दिन अत्यंत शुभ और प्रेरणादायक है। आज हम अपनी इच्छानुसार दान करें। दान का तातपर्य केवल धन के दान से नहीं, अपितु अहंकार को छोड़ें, करूणा को अपनाएं, परोपकार को अपनाएं, माया मोह के इस जंजाल से मुक्ति पाकर जितना सम्भव हो सके, हम अपनी क्षमतानुसार वस्तु का भी दान करें। संपदा का भी दान करें, साथ ही साथ ऐसा कार्य करें जिससे कि हम सामाजिक समरसता के क्षेत्र में विभिन्न सोपानों को स्थापित कर सकें।

उत्तरप्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से हम अपने शासकीय कार्यों के प्रति निर्वहन करते हुए तमाम ऐसे कार्य कर सकते हैं जो करुणा और परोपकार की भावना से ओतप्रोत होंगे; जैसे कि वृद्धा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन को स्वीकृति प्रदान करके उनके जीवन में नई खुशी लाएं। किसानों की फार्मर रजिस्ट्री बनाकर, डिजिटल क्रॉप सर्वे करके, और लोकतंत्र के इस महापर्व में हम अपने शासकीय कार्यों के निर्वहन के साथ युवा मतदाताओं को मतदाता सूची में सम्मिलित करने के प्रयास के साथ हम मकरसंक्रांति के इस त्यौहार को मना सकते हैं।

वहीं, आयुष्मान कार्ड के माध्यम से हम उन ऐसे लोगों को स्वास्थ्य का लाभ दिला सकते हैं जो केंद्र सरकार की योजना के अंतर्गत है। और माननीय प्रधानमंत्री जी और माननीय मुख्यमंत्री जी के उस स्वप्न का एक दूरदर्शी संदेश है कि हमारा प्रत्येक नागरिक स्वस्थ हो, और पीड़ा के समय उसको शासकीय सुविधा का वह कवच प्राप्त हो, जो पांच लाख रुपये की धनराशि से आच्छादित है। कहना तो बहुत कुछ चाहता हूँ। मकरसंक्रांति के इस शुभ अवसर पर आप भगवान सूर्य को नमन करें और शनिदेव के उस भाव को आत्मसात करें, जो पुत्र और पिता के बीच अन्योन्याश्रित सम्बन्धों पर टिका हुआ है, जिसमें एक पिता अपने पुत्र के लिए क्या कर सकता है। 

इसलिए तिल, गुड़ इत्यादि से बनी हुई मिठाइयों का दान करें। यथासंभव वस्त्रों का दान करें। अपने अहंकार का परित्याग करें, मोह का परित्याग करें और मकरसंक्रांति के इस पावन पर्व पर आप अपने जीवन में समरसता के लिए कार्य करें। और किसी भी व्यक्ति का अपनी वाणी, कर्म और वचन से अपमान न करें। उसकी भावना का सम्मान करें। सबसे बड़ा दान यही है कि अगर हम किसी की भावना का सम्मान करते हुए उसकी कुछ सहायता कर सकते हैं तो यह सबसे बड़ा दान है। आइए मिलकर हम इस दान को मकरसंक्रांति के इस पावन पर्व पर सनातन भारतीय संस्कृति के उस महत्वपूर्ण विषय पर जिसमें सूर्य भगवान की आज उत्तरायण में यात्रा शुरू हो रही है और मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो रही है, सभी को ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ मैं जिला मजिस्ट्रेट जौनपुर एक शेर के साथ आज की बात खत्म करना चाहूंगा-
मैंने चढ़ते सूरज ढलते देखे,
बुझते दीये जलते देखे,
हीरे का मोल कौन जाने,
मैंने खोंटे सिक्के चलते देखे।
लोकी कैंदी दाल न गलती,
प्रभु की कृपा से पत्थर गलते देखे,
जिन पुत्रों का कोई न होता,
हमने ऐसे पुत्तर पलते देखे।

आज सूर्य भगवान अपनी ऊष्मा से हम सबको आशीर्वाद दे रहे हैं, सूर्य भगवान के चरणों में नमन, प्रणाम और इस आशा व विश्वास के साथ कि हे सूर्य देव महाराज हम सदैव अच्छा कार्य करें, ऐसी शक्ति और प्रेरणा दें। शनिदेव महाराज की कृपा भी बनी रहे।। जय हिंद, जय भारत, सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं।

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