भारत की अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करने का संकल्प
भारत की अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करने का संकल्प @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी कुछ कहते हैं तो देश-दुनिया के लोग उसे बड़े ही गौर से सुनते हैं, क्योंकि उनके वक्तव्यों में आम आदमी की चिंता से लेकर खास आदमी की जिजीविषा तक समाहित होती है। गांव की पगडंडियों से लेकर राष्ट्र के राजमार्गों तक के कटु-मधु अनुभवों का सार उसमें मौजूद रहता है। हाल ही में पराक्रम दिवस के मौके पर उन्होंने जो कुछ कहा, उसका सार यही है कि भारत अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। उनकी यह सोच सराहनीय है और इस हेतु किया जा रहा हर कर्म अनुकरणीय। क्योंकि यह जो विशाल आसेतु हिमालय प्रदेश भारत वर्ष है, वह हम सबका ही विराट स्वरूप है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक ही कहा कि आज़ादी के अमृत महोत्सव का संकल्प है कि भारत अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करेगा। क्योंकि ये दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद देश की संस्कृति और संस्कारों के साथ ही अनेक महान व्यक्तित्वों के योगदान को मिटाने का काम किया गया। स्वाधीनता संग्राम में ...