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वीर गाथा परियोजना के सुपर 25 विजेताओं में बिहार से कोई नहीं, आखिर ऐसा कैसे?

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वीर गाथा परियोजना के सुपर 25 विजेताओं में बिहार से कोई नहीं, आखिर ऐसा कैसे? @ राजपथ/अशोक कौशिक, संपादक रक्षा मंत्रालय ने वीर गाथा परियोजना के सुपर 25 विजेताओं की घोषणा कर दी है, हालांकि इन दो दर्जन से अधिक विजेताओं में बिहार के किसी भी छात्र ने अपनी जगह नहीं बनाई है। ये उस बिहार की शैक्षणिक दुर्दशा को प्रकट करता है, जो पढ़ाई में अव्वल माना जाता है और देश के प्रशासनिक सेवाओं में जिसका सर्वश्रेष्ठ योगदान रहता आया है। इसलिए बिहार सरकार को, वहां सक्रिय निजी शिक्षा कारोबारियों को यह सोचना चाहिए कि आखिर ऐसा कैसे हुआ और इस स्थिति के लिए कौन, किस हद तक जिम्मेदार है। आपको पता है कि गणतंत्र दिवस 2022 कई मायनों में विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह भारत की स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में मनाया जा रहा है। आजादी के अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में, गणतंत्र दिवस समारोह में पहली बार कई नए कार्यक्रम किये जा रहे हैं। जीवन के सभी क्षेत्रों से उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करके इसे लोगों का उत्सव बनाने का प्रयास किया गया है। साथ ही गणतंत्र दिवस के आयोजनों की तैयारी की प्रक्रिया में भी लोगों में राष्...

पोस्टऑफिस में लावारिस पड़े करोड़ों रुपये से किया जाता है बुजुर्गों का कल्याण

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पोस्टऑफिस में लावारिस पड़े करोड़ों रुपये से किया जाता है बुजुर्गों का कल्याण @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार मानवीय स्वभाव के अनुरूप कुछ व्यक्ति खर्चीले होते हैं, तो कुछ मितव्ययी यानी बचत करने वाले। प्रायः देखा जाता है कि कोई वस्तु विशेष के रूप में बचत करने का आदी होता है तो कोई रुपये-पैसे के रूप में बचत करने का अभ्यस्त, ताकि उससे मनचाही वस्तु अपनी सुविधानुसार खरीदी जा सके। हालांकि बदलते दौर के साथ यही रुपया-पैसा अब निवेश-विनिवेश एक ऐसा ठोस जरिया बन चुका है, जिससे आप मनमाफिक बेहतर रिटर्न कमा सकते हैं। अमूमन भारतीयों के लिए पोस्ट ऑफिस निवेश के लिए सबसे सुरक्षित ठिकानों में से एक है। खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग अपनी बचत राशि को आज भी बैंकों के मुकाबले पोस्ट ऑफिस में रखना ज्यादा पसंद करते हैं।आजादी के बाद से ही डाकघर यानी पोस्ट ऑफिस में रुपये-पैसे को जमा करने का चलन बढ़ा है, क्योंकि यहां जमा की हुई रकम अपेक्षाकृत अन्य वित्तीय या बैंकिंग संस्थानों से ज्यादा सुरक्षित समझी जाती है।  # जब बचत की बात आती है तो पोस्टऑफिस की विभिन्न स्कीम्स की ओर ही रुख करते हैं आम भारतीय...

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री को भेजा खत

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प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री को भेजा खत # पत्रकारों के पीआईबी कार्ड के नवीनीकरण की तिथि बढ़ाई जाए: उमाकांत लखेड़ा # विस्तारित तिथि 31 जनवरी 2022 को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2022 किया जाए: विनय कुमार # प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, रायसीना रोड, नई दिल्ली के अध्यक्ष उमाकांत लखेड़ा और महासचिव विनय कुमार ने केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को लिखा पत्र कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता नई दिल्ली। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, रायसीना रोड, नई दिल्ली के अध्यक्ष उमाकांत लखेड़ा और महासचिव विनय कुमार ने केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को पत्र लिखकर पत्रकारों के पीआईबी कार्ड, 31 दिसंबर, 2022 तक के नवीनीकरण के सन्दर्भ में ध्यान आकृष्ट कराते हुए निम्नलिखित बातों की तरफ उनका ध्यान दिलाने की मंशा जताई है। उन्होंने बताया है कि आपके मंत्रालय के तहत आने वाले पत्र सूचना कार्यालय ने भारत सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकारों के पीआईबी कार्ड की वैधता की तारीख 31 जनवरी तक बढ़ाने की सूचना भेजी है। लेकिन अधिकारिक तौर पर नहीं बताया गया है कि पीआईबी कार्ड के नवीनीकरण में आखिर इतना अनावश्...

आखिर वीवीआईपी की सुरक्षा में चूक दर चूक पर उठते सवालों का जवाब कौन देगा?

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आखिर वीवीआईपी की सुरक्षा में चूक दर चूक पर उठते सवालों का जवाब कौन देगा? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार जिस देश में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रों की वजह से दो-दो प्रधानमंत्रियों की नृशंस हत्याएं हो चुकी हों, एक प्रधानमंत्री की विदेश में हुई मौत सवालों के घेरे में हो, कतिपय मुख्यमंत्री और मंत्रियों की भी हत्याएं हो चुकी हों, वहां पर वीवीआईपी की सुरक्षा व्यवस्था में सामने आ रही चूक दर चूक की घटनाओं को इतने हल्के में नहीं लिया जा सकता, जितने कि इसे हल्के में लेने के लिए हमारे नेता और प्रशासनिक अधिकारी आदी हो चुके हैं।  वहीं, सर्वोच्च न्यायालय को भी पीएम नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई ताजा चूक की घटना पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि उसके कतिपय निर्णय ने केंद्र सरकार के हाथ बांध दिए हैं, जिससे वह अक्षम राज्य सरकार पर भी ठोस कार्रवाई करने से महज इसलिए हिचकती है कि कहीं न्यायालय उसके फैसले को पलट नहीं दे। जी हां, हमारा इशारा किसी भी लापरवाह राज्य में तत्काल राष्ट्रपति शासन लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले कि न्यायिक समीक्षा से है, जिससे प्रतिपक्ष शासित ...

कोरोना काल में न घबराएं, बच्चों को स्तनपान जरूर कराएं

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कोरोना काल में न घबराएं, बच्चों को स्तनपान जरूर कराएं @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार सोशल टच यानी छुआछूत की बीमारी समझी जाने वाली कोरोना एवं इसके दर्जनों वेरियंट से विगत 2 वर्षों से जहां आम जनजीवन जहां बुरी तरह से प्रभावित हुआ है, वहीं नवजात शिशुओं की देखभाल, खासकर स्तनपान के तौर-तरीकों को लेकर भी आम जनमानस में भ्रम का माहौल है, जिसे दूर करने के लिए हमने शिशु रोग विशेषज्ञों से बातचीत की है, ताकि इस महत्वपूर्ण विषय पर सम्बन्धित माताओं का न केवल मार्गदर्शन किया जा सके, बल्कि आम जनजागरूकता पैदा करके कोविड 19 और जच्चा-बच्चा संक्रमण से जुड़ी भ्रांतियों को समाप्त करते हुए स्तनपान के महत्व पर प्रकाश डाला जा सके।   इस सिलसिले में हमने यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशांबी गाजियाबाद की नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ दीपिका से पूछा तो उन्होंने बताया कि कोविड 19 संक्रमण के तहत उपचाराधीन और संक्रमण संभावित माँ को भी सारे कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए स्तनपान कराना जरूरी है। ऐसी महिलाओं के लिए आवश्यक है कि वह स्तनपान से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह से साफ़ कर लें और नाक व ...

पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा में भारी चूक की जिम्मेवारी किसकी?

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पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा में भारी चूक की जिम्मेवारी किसकी? @ अशोक कौशिक, वरिष्ठ पत्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुद्धवार की सुबह बठिंडा पहुंचे, जहां से उन्हें हेलिकॉप्टर से हुसैनीवाला स्थित राष्ट्रीय शहीद स्मारक जाना था। लेकिन बारिश और खराब दृश्यता (विजिबिलिटी) के चलते उन्होंने करीब 20 मिनट तक मौसम के साफ होने का इंतजार किया। हालांकि जब मौसम में अपेक्षाकृत सुधार नहीं हुआ, तो यह तय किया गया कि पीएम मोदी सड़क मार्ग से ही राष्ट्रीय मेरीटर्स मेमोरियल का दौरा करेंगे, जिसमें 2 घंटे से अधिक समय लगेगा। हैरत की बात तो यह है कि जब पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) द्वारा आवश्यक सुरक्षा प्रबंधों की आवश्यक पुष्टि गई, जिसके बाद प्रधानमंत्री सड़क मार्ग से यात्रा करने के लिए आगे बढ़े। लेकिन हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक से लगभग 30 किलोमीटर दूर, जब प्रधानमंत्री का काफिला एक फ्लाईओवर पर पहुंचा, तो वहां कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क को अवरुद्ध कर दिया था। आलम यह रहा कि पीएम 15-20 मिनट फ्लाईओवर पर फंसे रहे, जो पीएम की सुरक्षा में एक बड़ी चूक...

सुपर पू स्टूल ट्रांसप्लांट क्या है? पू-स्टूल डोनेशन (मल दान) मिशन से इसे कैसे संपादित किया जाता है? किन किन बीमारियों में इसके क्या-क्या लाभ हैं? सविस्तार जानिए

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सुपर पू स्टूल ट्रांसप्लांट क्या है? पू-स्टूल डोनेशन (मल दान) मिशन से इसे कैसे संपादित किया जाता है? किन किन बीमारियों में इसके क्या-क्या लाभ हैं? सविस्तार जानिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार समकालीन दुनिया में नेत्रदान, रक्तदान, वीर्य दान, अंगदान, शरीरदान के बाद अब जो एक नया दान इन दिनों ट्रेंड में आया है, उसे "मल दान" यानी "पू या स्टूल डोनेशन" कहते हैं। ऐसे दान में हासिल उच्च गुणवत्ता वाले मल से मल प्रत्यारोपण यानी सुपर पू स्टूल ट्रांसप्लांट चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं, कुछ लोग मल डोनर बनकर पैसे भी कमा रहे हैं। मल चिकित्सा से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि किसी स्वस्थ इंसान के उच्च गुणवत्ता वाले मल का प्रत्यारोपण दूसरे अस्वस्थ इंसान की आंतों और पेट में किया जाता है तो इससे कई प्रकार की बीमारियां ठीक हो सकती हैं। जैसे- क्लॉसट्रिड्रियम डिफिसिल कोलाइटिस या सी डिफ। क्योंकि इसकी वजह से ही डायरिया, सेप्सिस और मौत तक हो सकती है। लेकिन यदि सही तरीके से परीक्षित किया हुआ मल रोगी की आंतों में डाल दिया जाए तो वह कई तरह की बीमारियों से...