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15 वीं वित्त आयोग से टाईड मद में बिहार को मिला 1112 करोड़: सम्राट चौधरी

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15 वीं वित्त आयोग से टाईड मद में बिहार को मिला 1112 करोड़: सम्राट चौधरी # प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह का जताया आभार  # उत्तर प्रदेश को 2162 करोड़, पश्चिम बंगाल को 978 करोड़, तमिलनाडू को 799 करोड़, गुजरात को 708 करोड़, झारखण्ड को 374 करोड़ एवं अन्य सभी प्रदेशों को टाईड मद में मिली करोड़ों की सहायता राशि  कमलेश पांडेय नई दिल्ली। 15 वें वित्त आयोग की सिफारिश पर वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत सरकार द्वारा टाईड मद में 1112 करोड़ रू बिहार को उपलब्ध कराया गया है। जिससे कि बिहार राज्य के त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं में नल-जल का काम, छठ घाट का निर्माण, कचरा प्रबंधन, पक्की गली-नाली निर्माण कराये जाएंगे। चूँकि बिहार में पंचायती राज चुनाव हो रहे हैं। इसलिए जनता लाभान्वित होगी। उन्होंने इस सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह को विशेष तौर पर धन्यवाद ज्ञापित किया है। जिन्होंने बंगाल को 978 करोड़, तमिलनाडू को 799 करोड़, गुजरात को 708 करोड़, उत्तर प्रदेश को 2162 करोड़,...

कर्म योग: निष्काम कर्म, सकाम लक्ष्य और जनसेवा का दृढनिश्चय

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कर्म योग: निष्काम कर्म, सकाम लक्ष्य और जनसेवा का दृढनिश्चय @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, जिलाधिकारी, बहराइच (यूपी) भारतीय संस्कृति कर्म प्रधान रही है। आधुनिक लोकतांत्रिक भारत में भी यही भावना प्रबल हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने भी कर्मयोग को महत्व दिया है। संत कबीर भी व्यवहारिक कर्म की सीख प्रदान करते हैं। तातपर्य यह कि मन की चंचलता को दूर कर निष्काम कर्म किया जाए, पूर्ण एकाग्रचित होकर सकाम लक्ष्य निर्धारित किया जाए और जनसेवा का दृढनिश्चय लेकर पूर्ण दत्त-चित्त से कर्म करते रहा जाए तो कठिन और दुर्लभ लक्ष्य को भी प्राप्त करके व्यक्तिगत हित से लेकर लोकहित का कार्य किया जा सकता है। देश काल पात्र प्रेरित अधिकांश महामानिषियों ने भी प्राणी मात्र के हित में ऐसा ही कार्य व आचरण करने का आह्वान किया है।  कर्मयोग नियंता भगवान श्रीकृष्ण उनके मुताबिक ज्ञानेंद्रियों व कर्मेन्द्रियों पर संयम स्थापित करके किसी भी व्यक्ति के द्वारा दुरूह से दुरूह लक्ष्य को साधा जा सकता है और जटिल से जटिलतम परिस्थितियों पर काबू पाया जा सकता है। भारतीय प्रशासनिक सेवाओं, प्रादेशिक प्रशासनिक सेवाओं समेत सभी विद्यार्थियों और उद्यमियो...

हॉलमार्किंग योजना क्या है? यह कितनी सफल हुई है? विस्तार पूर्वक बताइए।

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हॉलमार्किंग योजना क्या है? यह कितनी सफल हुई है? विस्तार पूर्वक बताइए। @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार स्वर्णाभूषण को अधिकांश भारतीयों की पहली पसंद समझा जाता है, फैशन के लिहाज से भी और निवेश के हिसाब से भी। लेकिन, इसकी खरीद-बिक्री में होने वाली धांधली किसी से छिपी हुई नहीं है। इसके मूल्य, नापतौल के तौर-तरीकों और इसमें होने वाली मिलावट यानी 24 कैरेट के बिस्कुट की बजाय 22 कैरेट, 20 कैरेट, 18 कैरेट और 16 कैरेट के बनने वाले आभूषणों यानी गहनों और उनके वास्तविक मूल्यों में होने वाले गड़बड़झालों की बात सरकार से छिपी हुई नहीं थी। इसलिए उसने हॉलमार्किंग योजना शुरू की। इससे इस धंधे की आड़ में होने वाली लेन-देन सम्बन्धी गड़बड़ियों और कालाबाजारी को भी रोकने में मदद मिलेगी। वस्तुतः, सोने के आभूषणों और कलाकृतियों की अनिवार्य हॉलमार्किंग 16 जून 2021 से चरणबद्ध तरीके से लागू होगी और शुरुआत में इसे 256 जिलों में लागू किया गया है। दरअसल, गोल्ड हॉलमार्किंग कीमती धातु की शुद्धता का प्रमाणीकरण है और वर्तमान में यह स्वैच्छिक है। फिर भी गत 1 जून से ज्वैलर्स को केवल 14, 18 और 22 कैरेट के सोने ...

राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना क्या है? सरकारी संपत्तियों में कैसे बढ़ेगा निजी क्षेत्र का निवेश? क्या विदेशी निवेशकों को भी मिलेगा कमाने का मौका? जानिए विस्तार से

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राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना क्या है? सरकारी संपत्तियों में कैसे बढ़ेगा निजी क्षेत्र का निवेश? क्या विदेशी निवेशकों को भी मिलेगा कमाने का मौका? जानिए विस्तार से @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार सरकार ने राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना के जरिये बुनियादी ढांचा योजनाओं पर खर्च के लिए पैसे जुटाने का चार साल का एक रोडमैप बनाया है, जिससे सरकारी बुनियादी ढांचा संपत्तियों में न केवल निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ेगा, बल्कि ढेर सारे रोजगार के मौके भी पैदा होंगे। यही नहीं, इस योजना के तहत विदेशी निवेशकों को भी मुनाफा कमाने का एक और अवसर मिलेगा। जानकारों की राय में, सरकार ऐसी संपत्तियों को ही निजी क्षेत्र या विदेशी कंपनियों को सौंपेगी, जिनका सुचारू रूप से संचालन वह खुद भी नहीं कर पा रही है। इस प्रकार से ऐसी संपत्तियों से कमाई राशि में भी सरकार को हिस्सा मिलेगा, जिससे उसकी आय बढ़ेगी।  केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने गत दिनों जब ‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन एनएमपी खंड 1 और 2’ का शुभारंभ किया, तो स्पष्ट किया कि जो केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र...

ई-श्रम पोर्टल क्या है? असंगठित क्षेत्रों के वर्करों को इससे क्या क्या फायदे होंगे?

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ई-श्रम पोर्टल क्या है? असंगठित क्षेत्रों के वर्करों को इससे क्या क्या फायदे होंगे? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार केंद्र में जब से मोदी सरकार आई है, वह समाज के दबे-कुचले और मेहनतकश वर्ग के लोगों को लक्षित करके कुछ न कुछ ऐसा जरूर कर रही है, जिससे समाज के इस बड़े तबके को इस बात का भरोसा हो जाता है कि यह सरकार उनके हितों की रक्षा करने और शासन-प्रशासन की विभिन्न योजनाओं का फायदा उन तक पहुंचाने के लिए प्रयत्नशील है। वाकई इस सरकार ने विगत सवा सात साल में जो कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं,  ई-श्रम पोर्टल उनमें से एक है और छोटे-मोटे रोजगार पेशा वालों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।  बता दें कि इसे लांच करके पीएम नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के असंगठित क्षेत्रों से जुड़े 38 करोड़ लोगों को एक बड़ा तोहफा दिया है। साथ ही, इस तबके के लिए एक टोल फ्री नम्बर भी जारी कर दिया है, ताकि रजिस्ट्रेशन से जुड़ी परेशानी सम्बन्धी अपनी बात वो सिस्टम तक बिना किसी अतिरिक्त खर्च के पहुंचा सकें और वहां से प्राप्त जानकारी का अपने लिए उपयोग कर सकें। इसलिए आज हम आपको बता रहे हैं कि ई-श्रम पोर्टल  ...

डिजिटल रूपी क्या है? यह कब से प्रचलन में आएगी?

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डिजिटल रूपी क्या है? यह कब से प्रचलन में आएगी? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार डिजिटल रूपी, एक प्रकार की भारतीय क्रिप्टो करेंसी होगी, जो कई मायने में दुनिया की दूसरी क्रिप्टोकरेंसी से अलग होगी। यह पूरी तरह से आरबीआई के द्वारा रेगुलेटेड होगी। यही नहीं, ऐसी भी व्यवस्था की जा रही है कि यह डिजिटल करेंसी किसके पास है, इसकी जानकारी आरबीआई को होगी। इसके लिए आरबीआई भारत में डिजिटल करेंसी का ट्रायल करने की योजना बना रही है और दिसम्बर 2021 में इसकी शुरुआत हो सकती है।  बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक पिछले कुछ सालों से  डिजिटल करेंसी की सेफ्टी और मॉनेटरी पॉलिसी पर इसके प्रभाव के साथ-साथ इसके प्रचलन में नकदी सहित विभिन्न पहलुओं पर गौर कर रहा है। भारत के केंद्रीय बैंक यानी रिजर्व बैंक की डिजिटल मुद्रा को सीबीडीसी के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि डिजिटल मुद्रा को ऑनलाइन रूप में लीगल टेंडर के रूप में प्रस्तावित किया जाता है। कहने का तातपर्य यह कि डिजिटल रुपया प्रचलन में चल रही फिएट करेंसी का ऑनलाइन वर्जन होगा। हाल में ही आरबीआई गवर्नर ने कहा कि आरबीआई डिजिटल करेंसी को लेकर काफी सत...

क्या साहिबाबाद विधायक अपना सियासी किला महफूज रख पाएंगे या लगेगी सेंध!

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क्या साहिबाबाद विधायक अपना सियासी किला महफूज रख पाएंगे या लगेगी सेंध! # जिन स्थानीय व क्षेत्रीय समीकरणों को साधकर भाजपा केन्द्र व राज्य में मजबूत हुई, उसमें मिल रही परिवर्तन की आहट  कमलेश पांडेय/राजनीतिक विश्लेषक गाजियाबाद। आगामी यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के मद्देनजर जनपद अंतर्गत साहिबाबाद विधानसभा सीट पर अधिकांश भाजपा नेताओं की नजर अपनी अपनी उम्मीदवारी के हिसाब से गड़ी हुई है। यह जानते हुए भी कि यहां से लगातार दो बार जीतने वाले भाजपा विधायक सुनील कुमार शर्मा के रहते हुए यहां किसी तीसरे नेता की दाल नहीं गलने वाली है। पार्टी ने सत्ता पाते ही उनका प्रोमोशन भी कर दिया है और राज्यमंत्री का दर्जा देने हेतु यूपी पंचायती राज समिति का अध्यक्ष बनवा दिया। हालांकि, कार्यकर्ताओं की पार्टी समझी जाने वाली भाजपा में अदना सा कार्यकर्ता भी यह सोचकर टिकट मांगते हैं कि वह मिले या न मिले, लेकिन अपना दावा जरूर ठोकना है।  पार्टी सूत्रों की मानें तो इस प्रतिष्ठित सीट पर केंद्रीय राज्यमंत्री और गाजियाबाद सांसद जनरल वी के सिंह की पुत्री मृणालिनी सिंह, केंद्रीय रक्षा मंत्री और गाजियाबाद के पू...