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अमेरिकी चक्रब्यूह में फंसे ईरान को तारणहार की तलाश!

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अमेरिकी चक्रब्यूह में फंसे ईरान को तारणहार की तलाश! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक खाड़ी देश ईरान में बढ़ते जनअसंतोष से अमेरिका-इजरायल के पौ बारह हो चुके हैं। जिस तरह से अमेरिका ने इस जनअसंतोष को हवा दी, उससे तो यही प्रतीत होता है कि देर सबेर ईरान को घुटने टेकने ही पड़ेंगे या फिर चीन-रूस-तुर्किये के अलावा इस्लामिक देशों का साथ लेकर उसे अपने अस्तित्व की रक्षा करनी होगी। हालांकि बेनेज़ुएला का नजीर उसके सामने है। अमेरिका जो चाहता है, कर लेता है। यहां भी रूस-चीन उसके राष्ट्रपति को नहीं बचा पाए। इसलिए यक्ष प्रश्न है आखिर ईरान कैसे अमेरिकी चक्रब्यूह को भेदेगा? क्या चीन-रूस-तुर्किये समेत 56 मुस्लिम देश ईरान की मदद को आगे आएंगे और उसका तारणहार बनेंगे? ऐसा सुलगता सवाल इसलिए कि ईरान अमेरिकी दबाव, सैन्य धमकियों और आंतरिक विरोध प्रदर्शनों के बीच गंभीर संकट में फंसा हुआ है, जहां ट्रंप प्रशासन स्ट्राइक विकल्पों पर विचार कर रहा है। ऐसे में ईरान के पास प्रतिक्रिया के सीमित लेकिन रणनीतिक विकल्प बाकी हैं, जो सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में फैले हैं। हालांकि, ईरान को यह...

भारत रत्न के बनते 'खुदरा बाजार' से उठते सियासी सवाल?

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भारत रत्न के बनते 'खुदरा बाजार' से उठते सियासी सवाल? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अपने चहेते नेताओं को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' दिलवाने की जो होड़ नेताओं और समाजसेवियों में मची है, उससे इसकी प्रतिष्ठा पर आंच स्वाभाविक है। इसलिए सवाल उठता है कि आखिरकार देश के प्रधानमंत्री भारत रत्न जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार को 'खुदरा बाजार' क्यों बनने दे रहे हैं, क्योंकि किसी को इसे देना या न देना उनका विवेकाधिकार/विशेषाधिकार समझा जाता है। इसलिए उनकी भूमिका पर सियासी सवाल उठना लाजिमी है और उनसे अपेक्षा की जाती है कि वो इसका राजनीतिक जवाब तो कतई नहीं दें! कहना न होगा कि 'भारत रत्न' भारत वर्ष का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जिसे कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और अन्य क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है। इसकी स्थापना 2 जनवरी 1954 को राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी। इसलिए सियासी लाभ या तुष्टिकरण के लिए इसे प्रदान करने से इसकी राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय गरिमा उसी प्रकार से घटेगी, जैसे नोबल का शांति पुरस...

पश्चिमी गोलार्द्ध में अमेरिकी दबदबा बढ़ने के वैश्विक मायने

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पश्चिमी गोलार्द्ध में अमेरिकी दबदबा बढ़ने के वैश्विक मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एशिया, यूरोप और अफ्रीका महादेश में अमेरिकी साम्राज्यवाद को मिलती मजबूत चुनौती के बाद अब पुनः उसने पश्चिमी गोलार्द्ध यानी उत्तर अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के देशों में खुद को मजबूत बनाने का पुनः निश्चय किया है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंफ की दूरदर्शिता और इतिहास से सबक, दोनों माना जा रहा है। शायद इसलिए उन्होंने बेनेज़ुएला, क्यूबा, मेक्सिको, कनाडा, ब्राजील आदि की नकेल कसनी शुरू की और ग्रीनलैंड को पुनः पाने की वैश्विक महत्वाकांक्षा प्रदर्शित की। चूंकि ट्रंफ एक कुशल व्यवसायी भी हैं, इसलिए उनकी रणनीति अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों के लिए अब भी एक पहेली बनी हुई है। अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने जिस तरह से रूस, चीन और भारत समर्थकों को निशाने पर लेना शुरू किया है, वह उनकी साहसिक पहल समझी जा सकती है। इसलिए अब यहां तक कहा जाने लगा है कि ट्रंफ ने डीप स्टेट के सामने घुटने टेक दिए हैं, ताकि मेक अमेरिका ग्रेट अगेन का उनका स्वप्न साकार हो सके। बताते चलें...

क्या पैक्स सिलिका में भारत को शामिल करने से अमेरिका को लाभ मिलेगा?

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पैक्स सिलिका क्या है? इसमें भारत को शामिल करने से अमेरिका को क्या लाभ मिलेगा? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पैक्स सिलिका (Pax Silica) अमेरिका की अगुवाई वाली एक रणनीतिक तकनीकी पहल है, जो सिलिकॉन-आधारित सप्लाई चेन को मजबूत करने पर केंद्रित है। यह एआई (AI), सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक निर्भरता कम करने का प्रयास करती है। यह नवीनतम अंतर्राष्ट्रीय पहल क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा संसाधनों, चिप निर्माण, एआई (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स की सुरक्षित सप्लाई चेन बनाती है। इसलिए अमेरिकी विदेश विभाग इसे "पॉजिटिव-सम" साझेदारी मानता है, जो चीन जैसी निर्भरताओं से बचाव करती है। इससे विश्वसनीय देशों में नवाचार और निवेश बढ़ता है। इस प्रकार पैक्स सिलिका का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में चीन के प्रभुत्व को कम करना और विश्वसनीय देशों के बीच सुरक्षित तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। चूंकि भारत के लिए इसका रणनीतिक महत्व है, इसलिए भारत को हाल ही में इसमें पूर्ण सदस्यता का न्योता मिला है, जो ग्लोबल चिप हब बनने का अवसर देगा। इसस...

मकर संक्रांति की शुभकामनाएं, जनसेवा और समरसता का भाव धारण करें, दान करें

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मकर संक्रांति की शुभकामनाएं, जनसेवा और समरसता का भाव धारण करें, दान करें @ दिनेश चंद्र सिंह, जिला मजिस्ट्रेट, जौनपुर जनपद, यूपी सनातन संस्कृति में मकर संक्रांति को दान-पुण्य का महापर्व माना गया है। वस्तुतः यह पर्व भगवान भास्कर यानी सूर्यदेव के उत्तरायण होने का प्रतीक है। चूंकि सनातनी शास्त्रों में उत्तरायण काल को देवताओं का समय कहा गया है, इसलिए इस अवधि में किए गए पुण्य कर्म अक्षय फल प्रदान करते हैं। इस प्रकार से मकर संक्रांति का दिन आत्म-शुद्धि, करुणा और सेवा भाव को जाग्रत करने का श्रेष्ठ अवसर है। इसलिये इस पावन तिथि पर सूर्यदेव की उपासना, स्नान, जप-तप और दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। मेरा मानना है कि मकर संक्रांति पर जनसेवा, समरसता और आत्मसंयम धारण करके सबकुछ पाया जा सकता है, क्योंकि समस्त दान कर्म, दया  धर्म इसी से अभिप्रेरित होंगे। जैसा किज शास्त्रों में कहा गया है कि "अन्नदान महादान है।" चूंकि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान कई गुना फल देता है। इसलिए मान्यता है कि इस दिन किया गया छोटा-सा दान भी व्यक्ति के कर्मों को श...

Sharda Hospital Greater Noida Organizes Mega Free Health Check-up Camp at Shri Ramanuj Kot Tilakdhari Ashram, Ganga Ghat, Shukratal

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Sharda Hospital Greater Noida Organizes Mega Free Health Check-up Camp at Shri Ramanuj Kot Tilakdhari Ashram, Ganga Ghat, Shukratal Shukratal, Muzaffarnagar: On the occasion of National Youth Day, a large-scale free health check-up camp was organized on Monday in Shukratal village of Muzaffarnagar district by Sharda Hospital Greater Noida.  The camp was held at Shri Ramanuj Kot Tilakdhari Ashram near Ganga Ghat, Shukratal. On this occasion, the Mahant of the ashram, Swami Shri Vishnu Acharya Ji Maharaj, said that this camp was organized in collaboration with Sharda Hospital on the occasion of the ashram's annual festival. Doctors from Sharda Hospital, including Dr. Akash Awana, Dr. Jayprakash Tiwari, and female physician Dr. Anupam Sharma, provided free consultations to more than 200 patients.  The camp also included bone density testing using a BMD machine, as well as blood sugar, blood pressure, BMI, and cataract screenings. Free medicines...

श्री रामानुज कोट तिलकधारी आश्रम, गंगा घाट शुक्रताल में शारदा हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा ने विशाल नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया

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श्री रामानुज कोट तिलकधारी आश्रम, गंगा घाट शुक्रताल में शारदा हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा ने विशाल नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया शुक्रताल, मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर सोमवार को मुजफ्फरनगर जिले के शुक्रताल ग्राम में शारदा हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा द्वारा एक विशाल नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया। यह कैंप श्री रामानुज कोट तिलकधारी आश्रम निकट गंगा घाट शुक्रताल में लगाया गया। इस मौके पर आश्रम के महंत स्वामी श्री विष्णु आचार्य जी महाराज ने बताया कि यह शिविर आश्रम के वार्षिकोत्सव के अवसर पर शारदा हॉस्पिटल के साथ मिलकर लगाया गया।  इस शहर में शारदा हॉस्पिटल के चिकित्सक डॉक्टर आकाश अवाना, डॉ जयप्रकाश तिवारी, महिला चिकित्सक डॉक्टर अनुपम शर्मा ने 200 से भी ज्यादा मरीजों को नि:शुल्क परामर्श दिया। साथ ही इस कैंप में हड्डियों में कैल्शियम की जांच बीएमडी मशीन द्वारा की गई और ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, बीएमआई और आंखों में मोतियाबिंद की जांच की गई।  इस शिविर में शारदा हॉस्पिटल की ओर से मरीज को नि:शुल्क दवाइयां भी बांटी गई। शिविर में आए 70 वर्ष ...