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मकर संक्रांति की शुभकामनाएं, जनसेवा और समरसता का भाव धारण करें, दान करें

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मकर संक्रांति की शुभकामनाएं, जनसेवा और समरसता का भाव धारण करें, दान करें @ दिनेश चंद्र सिंह, जिला मजिस्ट्रेट, जौनपुर जनपद, यूपी सनातन संस्कृति में मकर संक्रांति को दान-पुण्य का महापर्व माना गया है। वस्तुतः यह पर्व भगवान भास्कर यानी सूर्यदेव के उत्तरायण होने का प्रतीक है। चूंकि सनातनी शास्त्रों में उत्तरायण काल को देवताओं का समय कहा गया है, इसलिए इस अवधि में किए गए पुण्य कर्म अक्षय फल प्रदान करते हैं। इस प्रकार से मकर संक्रांति का दिन आत्म-शुद्धि, करुणा और सेवा भाव को जाग्रत करने का श्रेष्ठ अवसर है। इसलिये इस पावन तिथि पर सूर्यदेव की उपासना, स्नान, जप-तप और दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। मेरा मानना है कि मकर संक्रांति पर जनसेवा, समरसता और आत्मसंयम धारण करके सबकुछ पाया जा सकता है, क्योंकि समस्त दान कर्म, दया  धर्म इसी से अभिप्रेरित होंगे। जैसा किज शास्त्रों में कहा गया है कि "अन्नदान महादान है।" चूंकि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान कई गुना फल देता है। इसलिए मान्यता है कि इस दिन किया गया छोटा-सा दान भी व्यक्ति के कर्मों को श...

Sharda Hospital Greater Noida Organizes Mega Free Health Check-up Camp at Shri Ramanuj Kot Tilakdhari Ashram, Ganga Ghat, Shukratal

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Sharda Hospital Greater Noida Organizes Mega Free Health Check-up Camp at Shri Ramanuj Kot Tilakdhari Ashram, Ganga Ghat, Shukratal Shukratal, Muzaffarnagar: On the occasion of National Youth Day, a large-scale free health check-up camp was organized on Monday in Shukratal village of Muzaffarnagar district by Sharda Hospital Greater Noida.  The camp was held at Shri Ramanuj Kot Tilakdhari Ashram near Ganga Ghat, Shukratal. On this occasion, the Mahant of the ashram, Swami Shri Vishnu Acharya Ji Maharaj, said that this camp was organized in collaboration with Sharda Hospital on the occasion of the ashram's annual festival. Doctors from Sharda Hospital, including Dr. Akash Awana, Dr. Jayprakash Tiwari, and female physician Dr. Anupam Sharma, provided free consultations to more than 200 patients.  The camp also included bone density testing using a BMD machine, as well as blood sugar, blood pressure, BMI, and cataract screenings. Free medicines...

श्री रामानुज कोट तिलकधारी आश्रम, गंगा घाट शुक्रताल में शारदा हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा ने विशाल नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया

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श्री रामानुज कोट तिलकधारी आश्रम, गंगा घाट शुक्रताल में शारदा हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा ने विशाल नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया शुक्रताल, मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर सोमवार को मुजफ्फरनगर जिले के शुक्रताल ग्राम में शारदा हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा द्वारा एक विशाल नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया। यह कैंप श्री रामानुज कोट तिलकधारी आश्रम निकट गंगा घाट शुक्रताल में लगाया गया। इस मौके पर आश्रम के महंत स्वामी श्री विष्णु आचार्य जी महाराज ने बताया कि यह शिविर आश्रम के वार्षिकोत्सव के अवसर पर शारदा हॉस्पिटल के साथ मिलकर लगाया गया।  इस शहर में शारदा हॉस्पिटल के चिकित्सक डॉक्टर आकाश अवाना, डॉ जयप्रकाश तिवारी, महिला चिकित्सक डॉक्टर अनुपम शर्मा ने 200 से भी ज्यादा मरीजों को नि:शुल्क परामर्श दिया। साथ ही इस कैंप में हड्डियों में कैल्शियम की जांच बीएमडी मशीन द्वारा की गई और ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, बीएमआई और आंखों में मोतियाबिंद की जांच की गई।  इस शिविर में शारदा हॉस्पिटल की ओर से मरीज को नि:शुल्क दवाइयां भी बांटी गई। शिविर में आए 70 वर्ष ...

क्या टीएमसी-ईडी विवाद का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर प्रभाव पड़ेगा? समझिए सियासी मायने

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क्या टीएमसी-ईडी विवाद का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर प्रभाव पड़ेगा? समझिए इसके सियासी मायने  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दृष्टिगत राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जो केंद्र में सत्तारूढ़ है, के बीच जिस तरह की सियासी जंग छिड़ी हुई है; केंद्र व राज्य की प्रशासनिक मिशनरियों के दुरूपयोग की बातें सुनी जा रही हैं, उससे साफ है कि दिल्ली की तत्कालीन सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल की ही तरह पश्चिम बंगाल की मौजूदा मुखिया ममता बनर्जी को उनके पद से हटाकर ही भाजपा रहेगी।  यही वजह है कि भाजपा ने मशहूर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को शह प्रदान करने वाली कंपनी आई-पैक की नकेल कसने का निश्चय किया है और अपनी प्रशासनिक प्रभाव वाली मिशनरी ईडी को उसके पीछे लगा दिया है, जैसा कि आरोपी लगते आये हैं। तभी तो टीएमसी और ईडी के बीच कोयला तस्करी से जुड़े आई-पैक छापों पर विवाद तेज हो गया है, जहां ममता बनर्जी ने केंद्रीय एजेंसी पर चुनावी डेटा चोरी का आर...

तीखी बात: अमेरिका के इशारे पर न थिरकने वाले देश कीमत चुकाने के लिए तैयार रहें!

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तीखी बात: अमेरिका के इशारे पर न थिरकने वाले देश कीमत चुकाने के लिए तैयार रहें! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अंतर्राष्ट्रीय जगत में आर्थिक और तकनीकी दृष्टिकोण से संपन्न अमेरिका अपनी 'डीप स्टेट खलनीति' के बल पर दुनिया का दादा बन चुका है। चूंकि जी-7 के देश उसके मजबूत हाथ हैं, इसलिए ब्रिक्स देशों की औकात उससे खुलेआम उलझने की आजतक नहीं बन पाई है। आखिर पहले भारत के पास-पड़ोस में, फिर ईरान में और अब बेनेज़ुएला के दास्तान जो चुगली कर रही हैं, उसके वैश्विक मायने तो यही हैं। अब अगला नम्बर शायद कम्बोडिया का आएगा, जिसे ट्रंफ ने ताजा धमकी दी है। देखा जाए तो मेक अमेरिका ग्रेट अगेन के स्वप्नद्रष्टा डॉनल्ड ट्रंफ उनकी मुद्रा को चुनौती दिलवाने वाले, यदा कदा उनको आंखें दिखाने वाले रूस-चीन के मजबूत समर्थकों के एक एक कर रीढ़ तोड़ने और इसी झांसे में जांबाज भारत को धमकाकर अपने खेमे में मिलाने के लिए सधी चालें चलना शुरू कर चुके हैं। डीप स्टेट से जुड़े लोगों की मानें तो आगे अमेरिका अभी बहुत कुछ करने वाला है। इस बात का संकेत कभी न्यूयॉर्क के महापौर ममदानी और भारतीय-अमेरिकी आश...

दुनियादारी: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की कथनी व करनी में अंतर के वैश्विक मायने

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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की कथनी व करनी से बचकर रहें विकासशील देश @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कथनी और करनी में वैश्विक स्तर पर कतिपय महत्वपूर्ण अंतर दिखता है, जो खुद अमेरिका फर्स्ट नीति को ही प्रभावित करता है। उनकी आक्रामक बयानबाजी अक्सर प्रत्यक्ष सैन्य या आर्थिक कार्रवाइयों से मेल खाती है, लेकिन यह वैश्विक स्थिरता को भी चुनौती देती है। इससे सहयोगी देशों में अनिश्चितता बढ़ती है और प्रतिद्वंद्वी शक्तियां मजबूत होती हैं। इसलिए उनकी कथनी और करनी के अंतर को समझकर ही अपने अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा विभिन्न देश कर सकते हैं, अन्यथा अमेरिकी लाभ के शिकार बनते देर नहीं लगेगी। अचरज की बात तो यह है कि दुनिया को शांति का संदेश देने वाले ट्रंफ ही अब 'युद्ध' की अटकलों के सबसे बड़े पर्याय बनते प्रतीत होने लगे हैं। ट्रंफ की कथनी और करनी के कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं- पहला, ट्रंप ने वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर हमले का दावा किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने की बात कही, जो सोशल मीडिया पर साझा की गई। दूसरा,...

यक्ष प्रश्न: आखिरकार अमेरिका की हस्तक्षेपवादी राजनीति से कैसे सुरक्षित रहेंगे उसके प्रतिद्वंद्वी देश?

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आखिरकार अमेरिका की हस्तक्षेपवादी राजनीति से कैसे सुरक्षित रहेंगे उसके प्रतिद्वंद्वी देश? यक्ष प्रश्न! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक समकालीन रमणीक जनतांत्रिक दुनिया अमेरिकी वर्चस्व और उसकी समर्थित हिंसक हस्तक्षेपवादी राजनीति से तभी ज्यादा महफूज़ हो सकती है, जब शक्ति-संतुलन बहुध्रुवीय होगा, अंतरराष्ट्रीय क़ानून को वास्तविक दाँत मिलेंगे, और वैश्विक दक्षिण यानी ग्लोबल साउथ के देश परस्पर मिलकर वैकल्पिक संस्थागत ढांचे खड़े करेंगे। ऐसा इसलिए कि केवल नैतिक अपील या यूएनओ की प्रतीकात्मक निंदा से, जैसा कि यूक्रेन, गाजा और वेनेज़ुएला पर हालिया हमले में उसका गैरजिम्मेदाराना रोल दिखा, स्थितियाँ नहीं बदलेंगी। इसलिए यक्ष प्रश्न है कि आखिरकार अमेरिका की हस्तक्षेपवादी राजनीति से कैसे सुरक्षित रहेंगे उसके प्रतिद्वंद्वी देश? इसलिए खतरे की असल प्रकृति को समझना पड़ेगा, फिर रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, उत्तर कोरिया, कम्बोडिया, क्यूबा, मेक्सिको आदि देशों को परस्पर मिलकर अमेरिकी आपराधिक प्रवृति को हतोत्साहित करना होगा। इस निमित्त चीन को भी अपनी विस्तारवादी नीति और ईरा...