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अमेरिका के टैरिफ अटैक से प्रभावित होंगे भारतीय निर्यात, लेकिन लांग टर्म में कारोबारी हित रहेंगे अछूते!

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अमेरिका के टैरिफ अटैक से प्रभावित होंगे भारतीय निर्यात, लेकिन लांग टर्म में कारोबारी हित रहेंगे अछूते!  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक लीजिए, अंततोगत्वा अमेरिका ने भारत पर अपना टैरिफ बम फोड़ ही दिया। लेकिन अब भारत क्या जवाबी कार्रवाई करता है, इसपर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। उल्लेखनीय है कि गत बुद्धवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारतीय चीजों पर 25% जवाबी टैरिफ लगाने का पुनः ऐलान किया। हालांकि, चतुराई पूर्वक ट्रंप ने भारत को 'दोस्त' बताते हुए निज सोशल मीडिया साइट 'सोशल ट्रूथ' पर किये गए अपने पोस्ट में लिखा है कि यह टैरिफ 1 अगस्त से लागू होगा। वहीं, अभी तक यह भी साफ नहीं हुआ है कि ट्रंप का यह टैरिफ पहले से लागू 10% शुल्क के अतिरिक्त होगा या उसमें ही समाहित होगा। इसके अलावा, भारत की रूसी मित्रता के लिए जो अमेरिकी जुर्माना लगेगा, वह कितना होगा। बता दें कि ट्रंप ने इससे पहले गत 2 अप्रैल को भारत सहित कई देशों पर 10% टैरिफ लगाया था, जिसे पहले 90 दिनों तक और फिर बाद में 1 अगस्त तक टाल दिया था। वहीं, इस बार ट्रंप ने यह ऐलान भी किया कि...

पहलगाम आतंकी हमला: यूएनएससी रिपोर्ट में पाकिस्तान बेनकाब, काम नहीं आई चीनी-अमेरिकी दोस्ती!

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पहलगाम आतंकी हमला: यूएनएससी रिपोर्ट में पाकिस्तान बेनकाब, काम नहीं आई चीनी-अमेरिकी दोस्ती! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मॉनिटरिंग रिपोर्ट में भारत के पहलगाम आतंकी हमले में आतंकी संगठन "द रेजिस्टेंस फ्रंट" (टीआरएफ) की भूमिका का जिक्र होने के बाद अब पाकिस्तान के लिए बचने का कोई रास्ता नहीं रह गया है।इस प्रकार आतंकवादियों की मदद के लिए अब दुनिया से मुंह छिपाने का भी कोई रास्ता उसके लिए नहीं बचा हुआ  है। देखा जाए तो उसका यह झूठ अब दुनिया के सामने एक बार फिर बेनकाब हो चुका है कि भारत में हुए आतंकवादी हमले से उसका कोई नाता नहीं है। कुलमिलाकर यह अप्रत्याशित रिपोर्ट भारत के अनवरत यानी लगातार किए गए कूटनीतिक प्रयासों की जीत है। इससे यह भी स्पष्ट हो जाता है कि भारत के प्रति अमेरिका-चीन दोनों के रुख में नरमी आई है। खास बात यह है कि मॉनिटरिंग टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि टीआरएफ ने दो बार हमले की जिम्मेदारी ली है और यह पहलगाम आतंकी अटैक भी पाकिस्तान की जमीन से संचालित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एल...

आखिर अमेरिकी 'टेररिस्ट इकॉनमी' और इंडियन 'डेड इकॉनमी' जैसे आरोपों के अंतरराष्ट्रीय मायने क्या हैं?

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आखिर अमेरिकी 'टेररिस्ट इकॉनमी' और इंडियन 'डेड इकॉनमी' जैसे आरोपों के अंतरराष्ट्रीय मायने क्या हैं? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंफ ने दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और तेजी से मजबूत होती जा रही 'समाजवादी अर्थव्यवस्था' यानी भारतीय अर्थव्यवस्था को डेड इकॉनमी करार दिया है, तो एक भारतीय होने के नाते उनसे मेरा सीधा सवाल है कि आखिर उनकी अमेरिकी अर्थव्यवस्था क्या है- 'कैपिटलिस्ट इकॉनमी' या 'टेररिस्ट इकॉनमी!' मुझे पता है कि वो मेरे इस सवाल का जवाब नहीं देंगे, इसलिए आज उनकी डॉलर डिप्लोमेसी, मिलिट्री डिप्लोमेसी और घृणित कूटनीति को आईना दिखलाना अपना राष्ट्रघर्म/बुद्धिजीवी धर्म समझता हूं। वहीं, अमेरिका को यह भी स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि रूस के साथ भारत गर्त में नहीं, बल्कि उंस शिखर पर जाएगा जहां आज अमेरिका काबिज है!  सच कहूं तो सात समुंदर पार बसा अमेरिका यदि अपनी फूट डालो और राज करो वाली क्षुद्र नीतियों और अभद्र स्वभाव/व्यवहार के बल पर एशिया-यूरोप के देशों पर शासन करना चाहता है तो अब उसके दिन लद गए...

'ऑपरेशन सिंदूर' पर संसद में उठे सुलगते सवालों के मिले अस्पष्ट जवाबों के गम्भीर वैश्विक मायने को ऐसे समझिए

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'ऑपरेशन सिंदूर' पर संसद में उठे सुलगते सवालों के मिले अस्पष्ट जवाबों के गम्भीर वैश्विक मायने को ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े सुलगते हुए सवालों पर भारत की संसद के दोनों सदनों यानी राज्यसभा और लोकसभा में लगभग 32 घण्टे तक पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस चली, लेकिन नेता प्रतिपक्ष के दहकते हुए कुछ सवालों का सटीक जवाब प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और गृहमंत्री आदि नहीं दे पाए! इसके पीछे मौलिक वजह यह बताई जाती है कि विपक्ष के कुछ मूर्खतापूर्ण सवालों का जवाब चतुर सत्तापक्ष ने रणनीतिक पूर्वक गोलमोल तरीके से दिया है। तभी तो यह सवाल उठने लगे कि पीएम मोदी के भाषण द्वारा मिले जवाब में कुछेक विपक्षी सवालों का  सीधा और माकूल जवाब नहीं मिल पाया है? इस बाबत राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी भले ही संसद में अपनी बात रख चुके हों, लेकिन अभी तक उनके मार्फ़त कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। कहा जा रहा है कि पीएम मोदी की स्पीच में बहुत सारे सवालों के जवाब तो मिले लेकिन ढेर सारे सवालों क...

तीर्थस्थलों पर आकस्मिक भगदड़ से प्रबंधन की भूमिका पर सुलगते सवाल मांग रहे दो टूक जवाब

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तीर्थस्थलों पर आकस्मिक भगदड़ से प्रबंधन की भूमिका पर सुलगते सवाल मांग रहे दो टूक जवाब @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित सुप्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में गत रविवार को सुबह आरती के समय अचानक बेकाबू हुई भीड़ से मची भगदड़ से हुए हादसे में जहां 8 लोगों की जान चली गई, वहीं 26 लोग घायल बताए जा रहे हैं। इससे भक्त और भगवान के व्याकुल अन्तर्सम्बन्धों के साथ-साथ मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सुलगते हुए सवाल उठ हैं। ऐसा इसलिए कि अपने आपमें न तो यह पहली घटना है और न ही अंतिम! बावजूद इसके, बेगुनाहों की मौतों का यह सिलसिला कब थमेगा, विश्वास पूर्वक कुछ कहा नहीं जा सकता है, क्योंकि ब्रेक के बाद देश भर के सुप्रसिद्ध मंदिरों या फिर उससे जुड़े अनुष्ठानों में ऐसे हादसे होते रहते हैं। आंकड़े बताते हैं कि पहले भी भीड़ जुटने के बाद अचानक मचने वाली भगदड़ में कई जानें जा चुकी हैं। सिर्फ मंदिर ही नहीं, अन्य सेलिब्रेटिज के दीदार या यात्रा सम्बन्धी भीड़ बढ़ने के बाद भी महज एक छोटी सी अफवाह कई लोगों की जान ले लेती हैं और बहुतेरे लोगों को घायल कर जात...

मांसाहारी खाने पर जारी 'सेक्युलर सियासी खेल' के साइड इफेक्ट्स को ऐसे समझिए

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मांसाहारी खाने पर जारी 'सेक्युलर सियासी खेल' के साइड इफेक्ट्स को ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक सनातनी हिंदुओं के पवित्र श्रावण यानी सावन के महीने में या आश्विन माह में पड़ने वाले शारदीय नवरात्र के दिनों में पिछले कुछ वर्षों से नॉन-वेज फूड को लेकर जो विवाद सामने आ रहे हैं, वह इस बार भी प्रकट हुए और पक्ष-विपक्ष की क्षुद्र राजनीति के बीच अपनी नीतिगत महत्ता खो बैठे। वहीं, तथाकथित एनडीए शासित राज्य की बिहार विधानसभा के सेंट्रल हॉल में गत सोमवार को खाने में जिस तरह से नॉन-वेज भी परोसा गया, उसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तलवारें खिंच गई हैं।  इसी तरह, यूपी में कांवड़ यात्रा मार्ग स्थित ढाबों और भोजनालयों पर दुकान मालिकों की पहचान स्पष्ट करने का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में उठा। स्पष्ट है कि यहां भी मूल में भोजन ही है। इसलिए पुनः यह सवाल अप्रासंगिक है कि कोई क्या खाता है, क्या नहीं, यह पूरी तरह व्यक्तिगत मामला है और इस पर ऐसे विवाद से बचा जा सकता था। लेकिन ऐसे सो कॉल्ड सेक्यूलर्स और वेस्टर्न लॉ एडवोकेट्स को पता होना चाहिए कि सदियों से भारतीय ...

तो क्या उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पर्दे के पीछे से विपक्षी पिच पर खेलने की भारी कीमत चुकाई?

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 तो क्या उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पर्दे के पीछे से विपक्षी पिच पर खेलने की भारी कीमत चुकाई? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक मैंने अपने आलेखों के माध्यम से समय रहते ही आरएसएस-भाजपा को आगाह कर दिया था कि केंद्र सरकार, भाजपा और संघ के महत्वपूर्ण लोगों के बीच दरार डालने के लिए अमेरिकी, चीनी व पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां सक्रिय हैं, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार, उनकी पार्टी भाजपा और उनके पथप्रदर्शक-मार्गदर्शक आरएसएस को हर हाल में कमजोर बनाया जा सके। हैरत की बात है कि इसका सहज शिकार खुद जगदीप धनखड़ ही हो गए। अन्य किन-किन लोगों पर एजेंसियों ने पर्दे के पीछे से डोरा डाला है, यह तो किसी अन्य खुलासे या कार्रवाई के बाद ही पता चलेगा। ऐसा इसलिए कि केंद्र सरकार जब जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लोकसभा में महाभियोग लेकर आई, तो उस समय तक केंद्र सरकार की योजना थी कि लोकसभा स्पीकर की अगुवाई में जस्टिस वर्मा को हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी और ये कार्य केंद्र सरकार सर्वसम्मति से करेगी, ताकि न्यायपालिका में और न्यायपालिका के प्रति जनमानस में कोई गलत संदेश नहीं जा...