संदेश

पार्षद प्रतिनिधि सलेक चंद त्यागी ने मकनपुर पीएचसी पर विशेष टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया

चित्र
पार्षद प्रतिनिधि सलेक चंद त्यागी ने मकनपुर पीएचसी पर विशेष टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया राजनैतिक दुनिया गाजियाबाद। रविवार को मकनपुर पीएचसी पर पार्षद प्रतिनिधि सलेक चंद त्यागी द्वारा विशेष टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर उनकी अगुवाई में  अनेक बच्चों को टीकाकरण भी हुआ है। सभी बच्चों को  पोलियो की दवा भी पिलाई गई। इस कार्यक्रम में स्टाफ नर्स अरुणा राय, फार्मासिस्ट सुधीर, लैब टेक्नीशियन देवेंद्र, सुषमा, कमलेश एवं प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर स्मृति शर्मा मौजूद रहीं।

तिब्बत की आजादी के यक्ष प्रश्न का आखिर कब तक मिलेगा जवाब या फिर रहने दिया जाएगा अनुत्तरित

तिब्बत की आजादी के यक्ष प्रश्न का आखिर कब तक मिलेगा जवाब या फिर रहने दिया जाएगा अनुत्तरित  @ तीखी बात/कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार तिब्बत की आजादी 20 वीं शताब्दी का यक्ष प्रश्न है और 21 वीं शताब्दी के प्रथम चौथाई वर्ष तक भी इसका उत्तर न मिलना सभ्य समाज के लिए एक बड़ी चुनौती है। जैसे हमलोग छोटे-छोटे राज्यों के गठन को विकास के लिए जरूरी अवधारणा करार देते हैं, वैसी ही बात छोटे-छोटे देशों के गठन पर लागू की जा सकती है। खासकर दशकों से संघर्षरत उन क्षेत्र विशेष के लोगों के लिए, जो कभी आजाद थे, लेकिन 20 वीं सदी के नवसाम्राज्यवादी साम्यवादी महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ गए।  खासकर तिब्बतियों का सवाल उसमें सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए भारत सरकार को चाहिए कि वह नेहरुयुगीन वन चाइना पालिसी पर पुनर्विचार करे, क्योंकि वह हमारा विनम्र पड़ोसी देश रहा है। उससे हमारे गहरे आर्थिक और सांस्कृतिक सम्बन्ध रहे हैं। 1950 के दशक के अंतिम वर्षों से अबतक तिब्बत और उससे सटे भारतीय भूभाग के प्रति चीन का जो झपटमार रवैया रहा है, उसके मुत्तालिक यह और भी जरूरी हो जाता है कि आजाद तिब्बत ही अंतरराष्ट्रीय भारत...

केंद्रीय राज्य मंत्री ने वार्ड नम्बर 87 में बैडमिंटन और वॉलीबॉल कोर्ट का लोकार्पण किया

चित्र
केंद्रीय राज्य मंत्री ने वार्ड नम्बर 87 में बैडमिंटन और वॉलीबॉल कोर्ट का लोकार्पण किया राजनैतिक दुनिया ब्लॉगर गाजियाबाद। वार्ड नम्बर 87 अंतर्गत इंदिरापुरम के बालिका इन्टर कॉलेज में शहीद कैप्टन दविंदर सिंह जस्स मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा बनवाये गए बैडमिंटन और वॉलीबॉल कोर्ट का लोकार्पण क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री जनरल वी के सिंह ने किया। इस मौके पर पार्षद प्रतिनिधि सलेक चंद त्यागी समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।  कार्यक्रम में पहुंचे माननीय मंत्री जनरल सिंह ने न केवल  संस्था की इस पहल का स्वागत किया बल्कि ऐसी सोच के लिए कैप्टन जस्स के पिता भूपेन्द्र सिंह व माता दलबीर कौर की सराहना भी की। जनरल वी के सिंह ने वहां मौजूद बच्चियों को कैप्टन जस्स के जीवन से प्रेरणा लेते हुए देश सेवा के लिए आगे आने के लिए भी प्रोत्साहित किया।  इस कार्यक्रम में अल्पसंख्यक आयोग उ०प्र० के पूर्व सदस्य सरदार एस पी सिंह, स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती अमिता चौधरी, पार्षद निर्मला त्यागी के पति सलेक चंद त्यागी, मंडल अध्यक्ष अजय शुक्ला, डाक्टर हरदीप कौर, गुरप्रीत सिंह रम...

सलेक चंद त्यागी ने सुनील शर्मा के साथ खिचड़ी व कम्बल वितरित किया

चित्र
सलेक चंद त्यागी ने सुनील शर्मा के साथ खिचड़ी व कम्बल वितरित किया राजनैतिक दुनिया  गाजियाबाद। बीजेपी नेता और वार्ड नम्बर 87 के पार्षद प्रतिनिधि सलेक चंद त्यागी ने साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा के कार्यालय में मकर संक्रांति के पर्व पर कंबल और खिचड़ी वितरण किया। इस मौके पर बीजेपी के अन्य नेता गण भी मौजूद रहे और विधायक शर्मा के साथ मिलकर कम्बल और खिचड़ी वितरण किया। 

लिव इन रिलेशनशिप: इस अमर्यादित परम्परा को हतोत्साहित कीजिए

चित्र
लिव इन रिलेशनशिप: इस अमर्यादित परम्परा को हतोत्साहित कीजिए @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह/आईएएस आधुनिक दिलोदिमाग के लोगों द्वारा लिव इन रिलेशनशिप को चाहे कितना भी व्यवहारिक करार दिया जाए और इसे कानूनी अमलीजामा पहनाने के यत्न किये जाएं, लेकिन यदि आप तन और मन से भारतीय हैं तो इस अनैतिक और अमर्यादित परम्परा को हतोत्साहित करने की जरूरत है। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ कि ऐसे सम्बन्धों से जहां एक ओर प्रतिबंधित गर्भपात की विकृत मनोदशा को चोरी-छिपे बढ़ावा मिलता है, वहीं दूसरी ओर यदि संतान हो भी जाये तो उसे लेकर हमारा समाज तरह-तरह के किन्तु-परन्तु करता आया है और करता रहता है।  कोढ़ में खाज यह कि यदि ऐसे आवासीय सह-सम्बन्ध किसी विदेशी या आपराधिक प्रवृत्ति के युवकों-युवतियों के साथ या उनके बीच बन जाएं, तो उससे उतपन्न होने वाली लक्षित घटनाओं की तह तक पहुंचना राष्ट्रीय या प्रादेशिक सुरक्षा जांच एजेंसियों के लिए भी टेढ़ी खीर साबित होती है। कई बार तो ऐसे रिश्ते और उनके लक्षित दुरुपयोग से स्थितियां इतनी मुश्किल भरी हो जाती हैं कि उससे राष्ट्रीय हित व सुरक्षा दोनों प्रभावित होते हैं। वहीं, आज समाज में लव जिहाद के ...

पार्षद मनोज गोयल ने वैशाली सेक्टर 1 में पार्क के सौंदर्यीकरण कार्य का शुभारंभ करवाया

चित्र
पार्षद मनोज गोयल ने वैशाली सेक्टर 1 में पार्क के सौंदर्यीकरण कार्य का शुभारंभ करवाया # लोग बता रहे हैं कि नई दिल्ली के एनडीएमसी क्षेत्र के विकास को भी पीछे छोड़ चुका है वार्ड नम्बर 72 में जारी अप्रत्याशित विकास  राजनैतिक दुनिया ब्लॉगर गाजियाबाद। वार्ड नम्बर 72 के पार्षद मनोज गोयल के प्रयासों द्वारा रविवार को वैशाली सेक्टर 1 हाउस नंबर 301 के सामने वाले पार्क के सौंदर्यीकरण के कार्य का शुभारंभ किया गया। इस बात की जानकारी देते हुए निगम पार्षद मनोज गोयल ने बताया कि पार्क की चहारदीवारी और उसमें चलने के लिए फुटपाथ के निर्माण का कार्य पार्षद निधि द्वारा करवाए जा रहा है। इस अवसर पर संतोष रस्तोगी, केएल शर्मा व ईश्वरी देवी द्वारा नारियल फोड़कर इस कार्य का शुभारंभ किया गया। वहीं, पार्षद मनोज गोयल द्वारा सभी वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान फूल माला पहनाकर किया गया। इस अवसर पर सभी लोगों ने पिछले 5 साल में हुए विकास कार्यों की प्रशंसा की। कई लोगों ने तो दिल्ली स्थित एनडीएमसी क्षेत्र से भी अच्छा और ज्यादा विकसित वार्ड अपने वार्ड नम्बर 72 को घोषित कर दिया है। वहीं, पार्षद मनोज गोयल ने बताया कि पूरा वार्ड...

तो अब बीजेपी के सियासी भविष्य के लिए भी खतरा बन चुके हैं क्षेत्रीय दल!

चित्र
तो अब बीजेपी के सियासी भविष्य के लिए भी खतरा बन चुके हैं क्षेत्रीय दल! # पहले जनसंघ-बीजेपी और अब कांग्रेस-आप को साधकर बढ़ा चुके हैं अपना क्षेत्रीय दबदबा @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों के एक बार फिर से उभरने के चलते वह भारतीय जनता पार्टी पशोपेश में पड़ चुकी है, जो कि कभी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की आड़ में इन्हें खाद-पानी प्रदान करती आई है। यह बात दीगर है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के इन प्रयासों को मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक हद से ज्यादा कभी तवज्जो नहीं दी।  दरअसल ये वही समाजवादी राजनीतिक ताकतें हैं, जिनके साथ पहले 1977 में, फिर 1989 में और फिर 1998 व 1999 में भाजपा नेता कंधे से कंधा मिलाकर कांग्रेस मुक्त भारत का सपना संजोए बैठे थे। वैसे तो 2014 और 2019 में भी इनकी पूछ रही, लेकिन मोदी-शाह की जोड़ी ने इन्हें वैसा भाव नहीं दिया, जैसा कि अटल-आडवाणी की जोड़ी दिया करती थी। यही वजह है कि समाजवादी सियासत से निकले तमाम क्षेत्रीय दल भाजपा को कांग्रेस से ज्यादा बड़ी राजनीतिक चुनौती देने को आतुर दिखाई द...