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बजट अनुमान: पीपीएफ खाताधारकों के लिए अब निवेश की सीमा हो सकती है दोगुनी, आईसीएआई ने की है वकालत

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बजट अनुमान: पीपीएफ खाताधारकों के लिए अब निवेश की सीमा हो सकती है दोगुनी, आईसीएआई ने की है वकालत @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार बढ़ती महंगाई और कमाई के घटते अवसरों के बीच आने वाले अगले आम बजट 2022 के मद्देनजर इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने आगामी 1 फरवरी को संसद में पेश किए जाने वाले आम बजट में पीपीएफ में निवेश की अधिकतम सीमा को डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने की सिफारिश केंद्रीय वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से की है। उसे विश्वास है कि सरकार उसकी बात को मान जाएगी और शीघ्र ही घोषित होने वाले बजट प्रावधानों में उसे निश्चय ही जगह देगी। बता दें कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अगले 1 फरवरी 2022 को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए आम बजट पेश होगा, जिसके लिए सरकारी तैयारी लगभग पूरी हो गई है। इसके तहत स्टेकहोल्डर्स के अलावा राज्यों के वित्त मंत्रियों ने भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अपने अपने सुझावों की सूची (लिस्ट) सौंप दी है। इस कड़ी में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई), नई दिल्ली ने भी अपनी सिफारिशें भ...

वर्चुअल रैली क्या होती है? इसका क्या भविष्य है? इससे राजनीतिक दलों को कितना लाभ मिलेगा?

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वर्चुअल रैली क्या होती है? इसका क्या भविष्य है? इससे राजनीतिक दलों को कितना लाभ मिलेगा? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार कोविड 19 के बढ़ते संक्रमण के बीच वर्ष 2020 में संपन्न संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रपति पद के तत्कालीन दावेदार और अब मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति जो विडेन ने जिन वर्चुअल रैलियां और इलेक्शन कैंपेन का सहारा लेकर चुनावी विजय श्री का वरण किया है, अब वही डिजिटल व वर्चुअल तकनीक भारत में वर्ष 2022 में होने जा रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी धमाल मचाएगी। हालांकि इसके टेलर तो वर्ष 2020 में हुए बिहार विधानसभा के चुनाव और 2021 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव में भी देखे जा चुके हैं, जिससे भारतीय राजनैतिक दल भी बेहद उत्साहित हैं।  बता दें कि केंद्रीय चुनाव आयोग ने बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच सियासी दलों से अपील की है कि चुनाव प्रचार के लिए वो डिजिटल और वर्चुअल चुनाव प्रचार माध्यमों का अधिक से अधिक सहारा लें। क्योंकि आयोग ने चुनावों के दौरान किसी भी तरह की भीड़ नहीं जुटने देने की प्रशासनिक प्रतिबद्धता के मद्देनजर किसी भ...

पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में डिजिटल व वर्चुअल चुनाव प्रचार के लिए राजनीतिक दल कितने हैं तैयार, जानिए

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पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में डिजिटल व वर्चुअल चुनाव प्रचार के लिए राजनीतिक दल कितने हैं तैयार, जानिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार कोरोना की चुनौतियां और ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच केंद्रीय चुनाव आयोग ने देश के पांच राज्यों में आगामी 10 फरवरी से 7 मार्च के बीच सात चरणों में होने वाले विधानसभा चुनावों की क्रमशः 10, 14, 20, 23 व 27 फरवरी एवं 3 व 7 मार्च की तारीखों का ऐलान कर दिया है। लगे हाथ ही उसने चुनाव प्रचार के लिए नई गाइड लाइंस भी तय कर दी है, जिससे इन सभी राज्यों में डिजिटल और वर्चुअल चुनाव प्रचार की उम्मीदें जग गई हैं। हालांकि, इस पर निर्णायक निर्णय 15 जनवरी को कोविड समीक्षा के बाद आएगा। लेकिन 15 जनवरी तक सभी राजनीतिक दलों को डिजिटल व वर्चुअल चुनाव प्रचार पर ज्यादा निर्भर रहना होगा।  ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या राजनीतिक दल इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं? और यदि हां, तो क्या सभी मतदाताओं तक उनकी डिजिटल और वर्चुअल माध्यम से पहुंच संभव है! क्या सभी विधानसभा क्षेत्रों में डिजिटल संसाधन उपलब्ध हैं, जिसका फायदा निर्दलीय उम्मीदवार...

वीर गाथा परियोजना के सुपर 25 विजेताओं में बिहार से कोई नहीं, आखिर ऐसा कैसे?

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वीर गाथा परियोजना के सुपर 25 विजेताओं में बिहार से कोई नहीं, आखिर ऐसा कैसे? @ राजपथ/अशोक कौशिक, संपादक रक्षा मंत्रालय ने वीर गाथा परियोजना के सुपर 25 विजेताओं की घोषणा कर दी है, हालांकि इन दो दर्जन से अधिक विजेताओं में बिहार के किसी भी छात्र ने अपनी जगह नहीं बनाई है। ये उस बिहार की शैक्षणिक दुर्दशा को प्रकट करता है, जो पढ़ाई में अव्वल माना जाता है और देश के प्रशासनिक सेवाओं में जिसका सर्वश्रेष्ठ योगदान रहता आया है। इसलिए बिहार सरकार को, वहां सक्रिय निजी शिक्षा कारोबारियों को यह सोचना चाहिए कि आखिर ऐसा कैसे हुआ और इस स्थिति के लिए कौन, किस हद तक जिम्मेदार है। आपको पता है कि गणतंत्र दिवस 2022 कई मायनों में विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह भारत की स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में मनाया जा रहा है। आजादी के अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में, गणतंत्र दिवस समारोह में पहली बार कई नए कार्यक्रम किये जा रहे हैं। जीवन के सभी क्षेत्रों से उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करके इसे लोगों का उत्सव बनाने का प्रयास किया गया है। साथ ही गणतंत्र दिवस के आयोजनों की तैयारी की प्रक्रिया में भी लोगों में राष्...

पोस्टऑफिस में लावारिस पड़े करोड़ों रुपये से किया जाता है बुजुर्गों का कल्याण

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पोस्टऑफिस में लावारिस पड़े करोड़ों रुपये से किया जाता है बुजुर्गों का कल्याण @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार मानवीय स्वभाव के अनुरूप कुछ व्यक्ति खर्चीले होते हैं, तो कुछ मितव्ययी यानी बचत करने वाले। प्रायः देखा जाता है कि कोई वस्तु विशेष के रूप में बचत करने का आदी होता है तो कोई रुपये-पैसे के रूप में बचत करने का अभ्यस्त, ताकि उससे मनचाही वस्तु अपनी सुविधानुसार खरीदी जा सके। हालांकि बदलते दौर के साथ यही रुपया-पैसा अब निवेश-विनिवेश एक ऐसा ठोस जरिया बन चुका है, जिससे आप मनमाफिक बेहतर रिटर्न कमा सकते हैं। अमूमन भारतीयों के लिए पोस्ट ऑफिस निवेश के लिए सबसे सुरक्षित ठिकानों में से एक है। खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग अपनी बचत राशि को आज भी बैंकों के मुकाबले पोस्ट ऑफिस में रखना ज्यादा पसंद करते हैं।आजादी के बाद से ही डाकघर यानी पोस्ट ऑफिस में रुपये-पैसे को जमा करने का चलन बढ़ा है, क्योंकि यहां जमा की हुई रकम अपेक्षाकृत अन्य वित्तीय या बैंकिंग संस्थानों से ज्यादा सुरक्षित समझी जाती है।  # जब बचत की बात आती है तो पोस्टऑफिस की विभिन्न स्कीम्स की ओर ही रुख करते हैं आम भारतीय...

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री को भेजा खत

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प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री को भेजा खत # पत्रकारों के पीआईबी कार्ड के नवीनीकरण की तिथि बढ़ाई जाए: उमाकांत लखेड़ा # विस्तारित तिथि 31 जनवरी 2022 को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2022 किया जाए: विनय कुमार # प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, रायसीना रोड, नई दिल्ली के अध्यक्ष उमाकांत लखेड़ा और महासचिव विनय कुमार ने केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को लिखा पत्र कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता नई दिल्ली। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, रायसीना रोड, नई दिल्ली के अध्यक्ष उमाकांत लखेड़ा और महासचिव विनय कुमार ने केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को पत्र लिखकर पत्रकारों के पीआईबी कार्ड, 31 दिसंबर, 2022 तक के नवीनीकरण के सन्दर्भ में ध्यान आकृष्ट कराते हुए निम्नलिखित बातों की तरफ उनका ध्यान दिलाने की मंशा जताई है। उन्होंने बताया है कि आपके मंत्रालय के तहत आने वाले पत्र सूचना कार्यालय ने भारत सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकारों के पीआईबी कार्ड की वैधता की तारीख 31 जनवरी तक बढ़ाने की सूचना भेजी है। लेकिन अधिकारिक तौर पर नहीं बताया गया है कि पीआईबी कार्ड के नवीनीकरण में आखिर इतना अनावश्...

आखिर वीवीआईपी की सुरक्षा में चूक दर चूक पर उठते सवालों का जवाब कौन देगा?

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आखिर वीवीआईपी की सुरक्षा में चूक दर चूक पर उठते सवालों का जवाब कौन देगा? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार जिस देश में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रों की वजह से दो-दो प्रधानमंत्रियों की नृशंस हत्याएं हो चुकी हों, एक प्रधानमंत्री की विदेश में हुई मौत सवालों के घेरे में हो, कतिपय मुख्यमंत्री और मंत्रियों की भी हत्याएं हो चुकी हों, वहां पर वीवीआईपी की सुरक्षा व्यवस्था में सामने आ रही चूक दर चूक की घटनाओं को इतने हल्के में नहीं लिया जा सकता, जितने कि इसे हल्के में लेने के लिए हमारे नेता और प्रशासनिक अधिकारी आदी हो चुके हैं।  वहीं, सर्वोच्च न्यायालय को भी पीएम नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई ताजा चूक की घटना पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि उसके कतिपय निर्णय ने केंद्र सरकार के हाथ बांध दिए हैं, जिससे वह अक्षम राज्य सरकार पर भी ठोस कार्रवाई करने से महज इसलिए हिचकती है कि कहीं न्यायालय उसके फैसले को पलट नहीं दे। जी हां, हमारा इशारा किसी भी लापरवाह राज्य में तत्काल राष्ट्रपति शासन लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले कि न्यायिक समीक्षा से है, जिससे प्रतिपक्ष शासित ...