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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस की दुःखती रग को दबाने के सियासी मायने

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस की दुःखती रग को दबाने के सियासी मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारतीय राजनीति में कांग्रेस (आई) एक मध्यम मार्गी पार्टी समझी जाती है, जो दक्षिणपंथी और वामपंथी विचारधारा से सर्वथा भिन्न प्रतीत होती आई है। लेकिन अभूतपूर्व बिहार विजय के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उसे 'मुस्लिम लीगी माओवादी कांग्रेस' (एमसीसी- बिहार का एक खूंखार नक्सली संगठन) कहना अनायास नहीं है, बल्कि उसके समकालीन सियासी विचलन पर एक करारा राजनीतिक प्रहार समझा जा रहा है।  देखा जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस की इस दुःखती रग को दबाने के स्पष्ट सियासी मायने हैं, जिससे सबक लेकर जड़वत हो चली कांग्रेस अपना अहिल्या उद्धार कर सकती है। इससे कांग्रेस मुक्त भारत का स्वप्न भी साकार नहीं हो पाएगा। प्रधानमंत्री मोदी की हार्दिक इच्छा है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाए। वह पाकिस्तान के जनक 'मुस्लिम लीग' और बिहार की नक्सल संस्था माओवादी कोआर्डिनेशन कमेटी (एमसीसी) की ट्रू कॉपी बनने से परहेज करे।...

Human Academy celebrated Children’s Day with great joy and enthusiasm

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New Delhi: Human Academy celebrated Children’s Day with great joy and enthusiasm, filling the entire campus with vibrant energy and cheerful smiles. The programme began with a warm welcome extended to all students and guests, setting a positive tone for the occasion. Teachers highlighted the significance of Children’s Day, inspiring children to embrace their creativity and potential.  The event was graced by the Head of the Beti Raksha Dal, whose encouraging presence added value to the celebration.  He proudly presented certificates to the young participants, recognising their efforts and achievements. The Director of Human Academy also addressed the gathering, appreciating the enthusiasm and talents of the children. He further delighted the students by distributing thoughtful gifts, adding warmth and excitement to the event.  The thoughtful gestures, combined with the joyful atmosphere, created a memorable experience for every child. The celebrati...

बिहार में एग्जिट पोल ने राजग की बड़ी जीत और महागठबंधन की हार के संकेत पहले ही दे दिए थे!

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बिहार में हुए एग्जिट पोल से राजग की बड़ी जीत के आसार प्रबल, महागठबंधन फिर धराशायी # मुंहबोले चाचा ने भतीजे को फिर दी सियासी शिकस्त  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के अंतिम चरण के मतदान के बाद आए लगभग सभी पोस्ट पोल सर्वेक्षणों (एग्जिट पोल) में संभावना जताई गई है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) बड़े बहुमत के साथ एक बार फिर सरकार बना सकता है। इसमें भाजपा के सबसे बड़ी पार्टी के रुप में उभरने के आसार भी दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि असल नतीजे भी चुनाव बाद आए इन सर्वेक्षणों के आंकड़ों की तरह ही रहते हैं तो एक बार फिर राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, वाम दल और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के  महागठबंधन (इंडिया गठबंधन का बिहार क्लोन) के लिए सत्ता दूर की कौड़ी साबित होगी।      बिहार में जदयू नेता और विगत दो दशकों से मुख्यमंत्री बने रहने वाले नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले राजग में जनता दल (यू), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तान अवामी मोर्चा (हम) और राष्ट...

बिहार में जनसुराज की हार के पीछे आखिर प्रशांत किशोर की क्या रही रणनीति, इसे समझने में लगेगा वक्त!

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बिहार में जनसुराज की हार के पीछे प्रशांत किशोर की आखिर क्या रणनीति रही, इसे समझने में अभी वक्त लगेगा! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक देश के सुप्रसिद्ध चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पांडेय की नवस्थापित पार्टी जनसुराज की बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में हुई शर्मनाक हार से सियासी पंडित भी चौक गए हैं। वजह यह कि भाजपा, कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों की चुनावी रणनीति बनाते-बनाते आखिर कब और कैसे प्रशांत किशोर उर्फ पीके में सियासी नेता बनने की इच्छा प्रबल हो गई, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। इसके पीछे कांग्रेस और जदयू की अंदरूनी राजनीतिक परिस्थितियों का भी बहुत बड़ा हाथ है, जिससे प्रशांत किशोर की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को एक नया आकार मिला। उससे उत्साहित प्रशांत किशोर ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कर्मस्थली पश्चिम चंपारण, बिहार से एक नई शुरुआत की और अपना 3 साल बिहार के उन मुद्दों को दिया, जिसकी समकालीन राजनीति को बहुत जरूरत थी।इसलिए कुछ लोग उन्हें 'बिहार का अरविंद केजरीवाल' तक कहने लगे, जो अब एक सियासी व्यंग्य समझा जाने लगा है। लेकिन प्रारंभिक जनसंपर्क उ...

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन दलों की ओछी हरकतें अंततोगत्वा उन्हीं पर पड़ी भरी, जानिए कैसे?

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन में शामिल दलों की ओछी हरकतें अंततोगत्वा उन्हीं पर पड़ी भरी, जानिए कैसे? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजद, कांग्रेस, वीआईपी और उनके सहयोगी वामपंथी दलों की हार के कई प्रमुख कारण हैं। चूंकि इनके नेताओं व उनके खासमखास लोगों ने जानबूझकर एक गुप्त रणनीति के तहत एक दूसरे की बढ़त को रोकने के लिए कुछ ओछी चालें चलीं, जो अब खुद उनपर ही भारी पड़ चुकी हैं। जिनका विस्तृत विश्लेषण अग्रांकित है:- पहला, यादवों को अत्यधिक टिकट देने की रणनीति: राजद ने यादव बहुल सीटों पर अधिकतर यादव उम्मीदवार उतारे, जिससे एनडीए ने बड़ी संख्या में यादव बहुल सीटें जीत लीं; जबकि राजद का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। यह यादव वोट के बंटाव का नतीजा और एनडीए के मजबूत अभियान का फलक रहा। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि खेतिहर और दुधारू जाति यादवों में बड़े पैमाने पर राम-कृष्ण भक्त पाए जाते हैं जो अब हिंदुत्व के प्रबल पक्षधर के रूप में गोलबंद हुए हैं। इससे यूपी-बिहार में राष्ट्रवादी समाजवाद को मजबूती मिली है, जबकि सेक्युलर समाजवाद धराशायी ह...

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के जनादेश के मायने

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के जनादेश के मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों ने राज्य की राजनीति और सामाजिक समीकरणों पर बड़ा प्रभाव डाला है। इस बार बीजेपी नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन रिकॉर्ड सीटों के साथ भारी बहुमत से सत्ता में लौट रहा है, जबकि महागठबंधन (राजद-कांग्रेस गठबंधन) को गंभीर झटका लगा है।​ चुनाव परिणाम के निष्कर्ष से स्पष्ट है कि एनडीए ने 243 में से 200 से अधिक सीटों पर जीत सुनिश्चित की है, जिसमें बीजेपी को 91, जेडीयू को 81 एवं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 21 सीटें मिली हैं।​  वहीं, विपक्षी महागठबंधन महज 38 सीटों पर सिमट गया है, जिसमें राजद 26, कांग्रेस 4 और वामदल (सीपीआई, सीपीएम आदि) 6 सीटों पर आगे दिखे।​ ये आंकड़े अनंतिम हैं। इसमें मामूली बदलाव सम्भाव्य है। मतदाता प्रतिशत 66.91% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, महिलाएं 71.6% की हिस्सेदारी के साथ निर्णायक भूमिका में रहीं।​ इन नतीजों के मायने दिलचस्प हैं- पहला, शासन और नेतृत्व पर असर: चुनाव परिणाम ने "डबल इंजन" की सरकार यानी केंद्र-राज्य एक ही साझा गठबंध...

व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल क्या है? भारत इससे कैसे बच सकता है?

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व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल क्या है? दुनिया इससे  कितनी प्रभावित है? भारत इससे कैसे बच सकता है? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल संगठित अपराध का नया और बेहद खतरनाक रूप है, जिसमें डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, अध्यापक, प्रोफेशनल्स और अभिजात्य वर्ग के लोग आतंक की लॉजिस्टिक्स, फंडिंग, गुप्त संगठन और तकनीकी सहायता का काम करते हैं, जबकि सामने उनका समाज में सम्मानित और बेदाग चेहरा रहता है। यह खतरा आज न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में बढ़ रहा है और इसकी पहचान तथा रोकथाम बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी है​। # जानिए व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल क्या है? व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल ऐसे पेशेवर और पढ़े-लिखे लोग चलाते हैं, जिन पर आमतौर पर शक नहीं होता। इनका काम सीधे आतंकवादी हमला करना नहीं, बल्कि फंडिंग, लॉजिस्टिक सपोर्ट, रिक्रूटमेंट, गुप्त संचार, और तकनीकी सहायता देना है। हाल ही में दिल्ली और एनसीआर में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां डॉक्टर और मेडिकल स्टूडेंट्स ने बम, विस्फोटक, शस्त्र, और हाई-टेक उपकरण छुपाकर आतंकी संगठनों की मदद की​। खुफिया मामलों के जानकारों के ...