हे माननीय! आखिर अपनी जिम्मेदारी कब समझेंगे आप?
हे माननीय! आखिर अपनी जिम्मेदारी कब समझेंगे आप? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक समकालीन लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत सिलसिलेवार ढंग से जो 'संवैधानिक ड्रामा' रचाया जा रहा या चल रहा है, इसके लिए सिर्फ और सिर्फ 'हमारी संसद' जिम्मेदार है, क्योंकि जनहित में प्रभावशाली कानून बनाने का जिम्मा उसी के ऊपर है। यदि उसने इस मामले में अबतक किसी तरह की कोई लापरवाही बरती है तो यह जन-बहस का मुद्दा है। इसलिए कुछ सुलगता हुआ सवाल यहां पर प्रासंगिक है! लेकिन जब हम संसद की बात करते हैं तो इसकी सीधी जिम्मेदारी सत्तापक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधियों और उनके समूह की होती है। क्योंकि सत्ता की अदलाबदली प्रायः इन्हीं के बीच होती रहती है। संसद के अलावा, हमारी सिविल सोसाइटी, मीडिया मठाधीश, अधिवक्तागण, शिक्षाविद, प्रबुद्ध कारोबारी तबका एवं विभिन्न प्रकार के लोकतांत्रिक दबाव समूह भी इस स्थिति के लिए सामूहिक रूप से जिम्मेदार हैं, क्योंकि भले ही इनके पास कोई संवैधानिक शक्ति नहीं है या फिर अलग-अलग प्रकार की कानूनी सहूलियत प्राप्त है, लेकिन जनमत निर्माण में इनकी बहुत बड़ी भ...