आखिर मतदाता सूची की खामियों को कौन और कैसे करेगा दूर?
आखिर मतदाता सूची की खामियों को कौन और कैसे करेगा दूर? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक किसी भी देश में लोकतंत्र की सफलता वहां के नेताओं की नेकनीयती पर ही निर्भर करती है, क्योंकि वहां के जम्बोजेट प्रशासनिक अधिकारियों की फौज पर नियंत्रण प्रायः सत्ताधारी नेताओं का ही होता है। हमारे चतुर राजनेतागण यदि दूरगामी सियासी हितों की पूर्ति के लिए विपक्ष को भी साध कर चलें तो सोने पर सुहागा। यानी चित्त भी उनकी और पट्ट भी उन्हीं जैसों की। क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष की कुर्सियां तो प्रायः उन्हीं के बीच बदलती रहती हैं। यही वजह है कि पूरे प्रशासन पर कभी प्रत्यक्ष रूप से तो कभी अप्रत्यक्ष/परोक्ष रूप से उन्हीं लोगों का पूरा नियंत्रण होता है। हालांकि, चतुरसुजान नेताओं और दृढ़प्रतिज्ञ अधिकारियों के बीच व्यक्तिगत हितों की पूर्ति हेतु अनवरत धींगामुश्ती चलती रहती है, जिसमें कभी नेता तो कभी अधिकारी एक-दूसरे पर भारी पड़ते रहते हैं। सच कहूं तो इसी चक्कर में कभी-कभी दोनों को अपनी-अपनी कुर्सियां तक गंवानी पड़ती है। आपने देखा होगा कि चुनावी दिनों में चुनाव आचार संहिता लागू होते ही प्...