क्या लोकनायक, लोकनीति और संपूर्ण क्रांति से कुछ सबक लेंगे हमारे राजनेता?
क्या लोकनायक, लोकनीति और संपूर्ण क्रांति से कुछ सबक लेंगे हमारे राजनेता? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार जब देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हों, जिनमें से एक बिहार का जुड़वाँ भाई समझा जाने वाला उत्तरप्रदेश भी हो तो जेपी यानी जयप्रकाश नारायण की याद आना स्वाभाविक है। समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया के इस प्रदेश में यदि जातीय सूबेदारों को सही समावेशी सियासी आईना दिखाना हो तो समाजवादी सियासत को राजनीतिक शिखर प्रदान करने वाली सम्पूर्ण क्रांति के प्रणेता जयप्रकाश नारायण की याद बरबस आ जाती है। वजह यह कि एक ओर जहां राममनोहर लोहिया ने 1960 के दशक में समाजवादी सियासत को पिछड़ा पावे सौ में साठ का नारा देकर प्रभुता से लघुता की ओर धकेल दिया। वहीं, दूसरी ओर जयप्रकाश नारायण ने 1970 के दशक में सम्पूर्ण क्रांति का नारा देकर समाजवादी सियासत को लघुता से प्रभुता की ओर पुनर्स्थापित कर दिया। इसलिए आज उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव को राममनोहर लोहिया की राजनीतिक संकीर्णता से ज्यादा जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण क्रांति सरीखी राजनीतिक व्यापकता के नजरिये से देखने और उसकी के अन...