संदेश

आखिर दोषी नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध क्यों नहीं? बताए केंद्र सरकार

चित्र
आखिर क्यों दोषी नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध के खिलाफ है केंद्र सरकार? समझिए विस्तार से @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जब राजनीति से भ्रष्टाचार और अपराध खत्म करने के दृष्टिगत केंद्र सरकार ही गम्भीर नहीं है, तब इसे रोकवा पाना न्यायपालिका के लिए कतई संभव नहीं है। चूंकि केंद्र सरकार अपने वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व के इशारे पर हर फैसले लेती है, इसलिए बेलगाम नेताओं को कानूनी नजरिए से बांधने की अधिकांश न्यायिक पहल भी बेकार चली जाती है। सच कहूं तो नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर रह जाती है।  ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ कि खुद केंद्र सरकार ने ही दोषी करार दिए गए राजनीतिक नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने का अनुरोध करने वाली एक अर्जी का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया है। इससे सरकार की 'बदनीयती' समझ में आती है। एक तो वह समय रहते ही कानून नहीं बनाती है और दूसरे जब इसकी मांग उठती भी है तो अपने पूरे सियासी गिरोह की ढाल बनकर खड़ी हो जाती है।  तभी तो सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस तरह की अयोग्यता तय करना केवल संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। वहां द...

प्रयागराज महाकुंभ 2025: धर्म, कर्म, ज्ञान और प्रेम का अद्भुत समागम

चित्र
प्रयागराज के दिव्य भव्य सांस्कृतिक आस्था का महाकुंभ 2025 प्रेरणादायक रहा # आस्था और विकास की नई संभावनाओं का उत्तरप्रदेश # ज्ञान, कर्म और प्रेम की त्रिवेणी प्रयागराज को ऐसे समझिए @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस प्रयागराज मेरी कर्मभूमि है। मैंने इसे हर नजरिए से पढ़ा है और आत्मीयता भाव पूर्वक उसे गढ़ा है। इस शहर की इंद्रधनुषी सांस्कृतिक छँटा आपको भाव विभोर किये बिना नहीं रहेगी। महाकुंभ 2025 के आयोजन से इसकी विश्वव्यापी प्रसिद्धि बढ़ी है। धार्मिक आस्था और पौराणिक महत्व वाले इस शहर के विभिन्न पहलुओं की चर्चा मैं यहां कर रहा हूँ ताकि इसके विभिन्न महत्ता से आप भी अवगत हो सकें।  वैसे तो ज्ञान, धार्मिक एवं सांस्कृतिक समागम की पवित्र भूमि प्रयागराज की महिमा, गरिमा, पूण्य प्रताप और आशीर्वाद के बारे में मैंने विभिन्न लेख में बहुत आत्मीय अनुभूति और गहन अध्ययन के साथ लिखता आया हूँ। अपनी सुदीर्घ वर्षों की साधना एवं लगभग तीन दशकों लंबे के प्रशासनिक अनुभव के बारे में विस्तार से लिखा है। जो भी समझा, उसे अपनी अल्प बुद्धि, ज्ञान और अनुभव के आधार पर लिखा और मन के उद्गार को देश-समाज हित में अभिव्...

धर्म, कर्म, आस्था की त्रिवेणी में सुखद सुरुचिपूर्ण संगम स्नान की दिव्य अनुभूति को ऐसे समझिए

चित्र
@ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस महाकुंभ 2025 में संगम स्नान का अपना महत्व है, लेकिन यह बार-बार किया जाए, वो भी वीवीआईपी बनकर, यह अनुचित है। मेरी अंतरात्मा ने इस पर गौर किया और मैंने संगम स्नान की जगह भक्त समूह से निकलते रहनी वाली सकारात्मक ऊर्जा स्नान को तवज्जो दी। ऐसा इसलिए कि 21 फरवरी 2025 दिन शुक्रवार का संयोग ही कुछ ऐसा बना दैवीय प्रेरणा और पेशेवर कार्यवश। यह दिन मेरे लिए सभी दृष्टि से खासकर धार्मिक दृष्टि से पुण्य प्रदायक और प्रशासनिक एवं न्यायिक दृष्टि से उपलब्धियों भरा रहा।  दरअसल, शुक्रवार को ही माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज में न्यायालय खंड पीठ 3 के समक्ष जिलाधिकारी जौनपुर के तौर पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश के क्रम में मुझे 10 बजे प्रातः न्यायालय में उपस्थित होना था। इसलिए मैं अहले सुबह में 4 ए.एम. पर उठा और दैनिक प्रातःकालीन कार्य जिसके अंतर्गत स्नान, ध्यान, पूजा के संक्षिप्त कार्य होते हैं, को नियमितता पूर्वक संपादित करने के पश्चात् मैं प्रयागराज के लिए स्वयं सम्पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था के साथ 5.14 पर रवाना हुआ।...

उत्तरप्रदेश की योगी सरकार की उत्कृष्ट प्रबंधकीय व्यवस्था का अनुपम उदाहरण है महाकुंभ 2025

चित्र
@ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस "मैं कहाँ और आप कहाँ, यह एहसास ही तो नहीं, मुझमें और आप में! इसलिए अनवरत संघर्षरत हैं, अपनी एहमियत को स्थापित करने की, संघर्ष भरी! कंटकाकीर्ण जिंदगी की यात्रा में!" यानी मैं और आप के अंतर और विभिन्न पदेन संघर्षपूर्ण यात्रा से प्राप्त प्रतिष्ठित व्यक्तित्व की ऊंचाइयों पर पहुंचे, संत, संन्यासी, राजनीतिज्ञ, न्याय की मूर्ति न्यायाधीश, लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रतिष्ठा, जनप्रतिनिधित्व के प्रतीक, समाज की व्यवस्था को यथार्थ की ऊसर, अनुपजाऊ भूमि के साथ उर्वरा भूमि में तब्दील करने को प्रतिबद्ध, विभिन्न प्रलोभनों एवं व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए समष्टि की समृद्धि का आवरण होकर नितांत व्यैक्तिक उपलब्धियों के लिए प्रयासरत, सभी वर्गों के लोग! क्योंकि हम भारत के लोग ही भारतीय लोकतंत्र की आन-बान-शान हैं। परन्तु प्रत्येक वर्ग के उच्च शिखर पर बैठे और उस वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रतिष्ठित भारत के नागरिक, चाहे वह पूज्य संत हो, माननीय राजनीतिज्ञ हों, न्याय के लिए प्रतिबद्धता के साथ जनता की उम्मीदों के न्याय का प्रकाश पुंज न्यायाधीश हो और क...

महाकुंभ 2025 की अतुलनीय प्रशासनिक तैयारियां अब शोध-अनुसंधान का विषय, योगी जी को मिला यश

चित्र
# अद्भुत और अविस्मरणीय, महाकुंभ स्नान से होती है चार पुरुषार्थों की प्राप्ति @ डॉ दिनेश चन्द्र सिंह, आईएएस   "प्रथमं तीर्थराजं तू प्रयागाख्यं सुविश्रुतिम। कामिकं सर्वतीर्थानां धर्म कामार्थ मोक्षदम।।" अर्थात तीर्थराज प्रयाग का नाम सर्वश्रेष्ठ तीर्थ के रूप में लोक विख्यात है। यह सभी तीर्थों के फलों को देने वाला अकेला तीर्थ है, जो व्यक्तिविशेष के जीवन में- धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष- नामक चारों पुरुषार्थों का प्रदाता है। यूँ तो हर 12 वें वर्ष में यहां कुंभ का आयोजन अनंत काल से हो रहा है, लेकिन महाकुम्भ का आयोजन प्रयागराज हर बार 144वें वर्ष में ही होता है। इसलिए पतित पावनी गंगा, कलंक प्रक्षालिनी यमुना और अंतर्धारा पुण्य सलिला सरस्वती नदी के त्रिवेणी संगम तट पर अवस्थित प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत गणराज्य का अलग ही महात्म्य है। सनातन मनीषियों के मुताबिक, हर 144 वर्ष के अंतराल पर और इस बार वर्ष 2025 में पुनः ग्रहों का ऐसा शुभ संयोग बना है जिसके कारण यहाँ आना और संगम तट पर स्नान-ध्यान करना पुण्यबर्धक समझा जाता है। 2025 का दिव्य महाकुंभ 144 वर्षों की सुदीर्घ प्रतीक्षा के ब...

भारत को मजबूत बनाने के लिए नरेंद्र मोदी की कीप एंड बैलेंस थ्योरी को ऐसे समझिए

चित्र
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक 21वीं सदी के एशियाई बिस्मार्क समझे जाने वाले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'कीप एंड बैलेंस' थ्योरी से जहां विकसित देश अमेरिका, रूस, चीन हैरान-परेशान हैं, वहीं भारत ग्लोबल साउथ यानी तीसरी दुनिया के देशों के दूरगामी हितों की हिफाजत करते हुए तेजी से आगे बढ़ता जा रहा है। यह बात मैं नहीं कह रहा हूँ बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंफ, रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा वक्त-वक्त पर की हुई बयानबाजियां इस बात की चुगली करती हैं। इसके अलावा भी बहुतेरे राष्ट्राध्यक्ष हैं जो कुछ ऐसी ही बातें छेड़ चुके हैं, जो गलत भी नहीं है। समझा जाता है कि जैसे भारतीय सियासत में उन्होंने अटलबिहारी बाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे कद्दावर नेताओं को साधते हुए नरेंद्र मोदी ने खुद को एक आदमकद चेहरे के रूप में स्थापित करते हुए पहले मुख्यमंत्री, फिर प्रधानमंत्री बने। ठीक वैसे ही अब अमेरिका, रूस और चीन को साधते हुए वो भारत के नेतृत्वकर्ता के तौर पर अपने राष्ट्र को एक अग्रणी विकसित देश की कतार में खड़ा करक...