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शाश्वत राजकाज में मान्य योग्य वही होत है जो परहित के जाई

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शाश्वत राजकाज: मान्य योग्य वही होत है जो परहित के जाई @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, जिलाधिकारी, बहराइच, उत्तरप्रदेश। "मान्य योग्य नहि होत कोई जो कोरे पद पाई। मान्य योग्य वही होई जो परहित के जाई।।" साधारण ढंग से अति सुंदर, कालातीत तथा चिरस्थायी भाव को उपरोक्त पंक्तियों में अभिव्यक्त किया गया है। परंतु कुछ व्यक्ति एवं परिवार मानसिक कुंठा, अवसाद, ईर्ष्या एवं निज क्रोध के कारण अपने अग्रणी, मान्य, पूज्य, सदैव जनहित व मानवीय मूल्यों की स्थापना के प्रति सजगता से कार्य करने की प्रतिबद्धता रखने वाले ऐसे व्यक्तियों को कोसते हैं, जो अनुचित है। ऐसे कुंठित लोग या समाज, जो आत्मसुख के लिए कार्य करने वाले हैं, अनुपयोगी, नितांत स्वार्थ सुख की भावना से अभिप्रेत प्रयासों के कारक हैं, की जितनी निंदा की जाए, वह कम है।  आधुनिक युग के स्वार्थपरक, मात्र व्यक्तिगत हितों की प्रतिपूर्ति के लिए किए जा रहे प्रयासों को पूर्ण करने की चेष्टा रखने वालों के बारे में कुछ भी बोलना निरर्थक है। किसी मर्यादा, शिष्टाचार एवं आदमकद व्यक्ति की सुदीर्घ साधना को नितांत क्षणिक व व्यक्तिगत सुख भोग की आकां...

साइकिलिंग राइड: पास-पड़ोस के गांवों में मिलता है अद्भुत आनंद

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साइकिलिंग राइड: पास-पड़ोस के गांवों में मिलता है अद्भुत आनंद प्रदूषण दिया है तो खुली हवा में सांस लेने की जगह भी..निकलिए तो सही @ गौरव पांडेय, जनस्वास्थ्य कार्यकर्ता सुप्रसिद्ध शायर मेराज फैजाबादी के शेर को आज हमने जिया- "ज़िंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना, पाँव बख़्शें हैं तो तौफ़ीक़-ए-सफ़र भी देना।" उसी तर्ज पर मेरी दो लाइनें अर्ज हैं:- "प्रदूषण दिया है, तो खुली हवा में सांस लेने की जगह भी देना। हम शहर में रह रहे हैं तो क्या हुआ गौरव, शहर के पास एक गाँव भी देना। जहां दरिया हो झीलें हो, चिड़ियों की चहचहाहट हो, जो आए कोई गम में डूबा, उस पर बरसता खुशियों का समंदर हो। ले चलो मुझे उस जमीं पर ऐ गौरव, जहां खुशियों का बसेरा हो।" क्या आपने कभी सोचा है कि आप शहर में रहते हुए चंद मिनटों में ही ग्रामीण जीवन एवं प्रकृति का आनंद ले सकते हैं? अधिकांश लोग सोचते हैं कि शहरी जीवन, गांव के जीवन की तुलना में अधिक शानदार जीवन है। लेकिन ऐसा नहीं है। कई मायनों में गंवई जीवन ही अव्वल होता है। आज इंदिरापुरम रनर्स एवं साइकिलिंग ग्रुप द्वारा अमित सिलावट...

चंडीगढ़ स्थित पंचकूला में पूर्वांचल भवन बनाने के लिए जमीन आवंटित करे हरियाणा सरकार: सम्राट चौधरी

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चंडीगढ़ स्थित पंचकूला में पूर्वांचल भवन बनाने के लिए जमीन आवंटित करे हरियाणा सरकार: सम्राट चौधरी # चंडीगढ़ में पूर्वांचल भवन बनाने के लिए बिहार के मंत्रियों ने हरियाणा के मुख्यमंत्री को लिखा पत्र कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता नई दिल्ली। बिहार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी, श्रम संसाधन मंत्री जीवेश कुमार एवं कला-संस्कृति व युवा विभाग मंत्री आलोक रंजन ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से चंडीगढ़ स्थित पंचकूला में पूर्वाचल भवन निर्माण हेतु जमीन आवंटित करने का अनुरोध किया है।  मंत्री त्रय ने उन्हें लिखे पत्र में आग्रह के साथ कहा है कि पंजाब, हरियाणा एवं चंडीगढ़ में पूर्वांचल यानी बिहार, झारखंड एवं उत्तर प्रदेश राज्य के अधिसंख्य लोग निवास करते हैं एवं उनका आना जाना लगा रहता है। इसके अलावा, पूर्वांचल वासी एवं उनके सगे-संबंधी व अन्य अतिथिगण अपने सगे-संबंधी एवं परिचित लोगों से मिलने आते हैं, तो आगन्तुक को यहाँ ठहरने से लेकर अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है।  ऐसी परिस्थिति में पूर्वाचल वासियों एवं अतिथियों के लिए एक बृहद पूर्वांचल...

जो इंसान अच्छे स्वास्थ्य का आनंद लेता है वही है सबसे बड़ा अमीर आदमी

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जो इंसान अच्छे स्वास्थ्य का आनंद लेता है वही है सबसे बड़ा अमीर आदमी  # यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी के सहयोग से इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल, इंदिरापुरम में 'प्रथम निःशुल्क चिकित्सा शिविर' का किया गया आयोजन कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता गाजियाबाद। स्वास्थ्य और भलाई के सतत विकास लक्ष्य 2030 के एसडीजी 3 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल, इंदिरापुरम द्वारा एक हेल्थ एंड वेलबिंग फॉर ऑल सिरीज़ का मंगलवार को विधिवत उद्घाटन किया गया। बता दें कि एसडीजी 3 का उद्देश्य "अच्छा स्वास्थ्य और जीवनस्तर" है जिसका लक्ष्य सभी को स्वस्थ जीवन देना और सभी के जीवनस्तर में सुधार लाना है। इस सिरीज़ के प्रथम कार्यक्रम के रूप में गत 15 दिसंबर को यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी के सहयोग से  'प्रथम निःशुल्क चिकित्सा शिविर' का आयोजन किया गया।  इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल ग्रुप की डायरेक्टर श्रीमती रीता सिंह ने यशोदा हॉस्पिटल कौशाम्बी के कॉर्पोरेट रिलेशन्स एवं जनसम्पर्क विभाग के प्रमुख गौरव पांडेय के साथ फीता काट कर स्वास्थ्य शिविर...

स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है नमक खाना: डॉ मनीष कुमार

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स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है नमक खाना: डॉ मनीष कुमार # नमक खाऊँ या न खाऊँ की दुविधा में न पड़ें, अनुशंसित मात्रा में नियमित रूप से लें कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता दिल्ली/गाजियाबाद। भारतीय संस्कृति में नमक का बहुत महत्व है। कोई भी व्यक्ति यदि किसी का नमक खा लेता है तो वह उसके साथ किसी भी कीमत पर धोखाधड़ी नहीं कर सकता, अन्यथा उसे नमकहराम तक कहा जाता है। किसी भी व्यक्ति के मृत्यु के बाद होने वाले श्राद्धकर्म के अंतिम दिन भी रक्त सम्बन्धियों के बीच नमक मिलने की प्रथा है, जिससे भारतीय समाज में नमक की महत्ता का पता चलता है। भारतीय चिकित्सा शास्त्र की एलोपैथी, आयुर्वेदिक व होमियोपैथी विधा में भी साल्ट (नमक) की अनुशंसित मात्रा से रोगियों का इलाज किया जाता है। इस सम्बन्ध में दिल्ली-एनसीआर के सुप्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ मनीष कुमार ने कहा है कि ज्यादातर लोग नमक को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक ही समझते हैं, जो कुछ हद तक ठीक भी हो सकता है; क्योंकि ब्लड प्रेशर से इसका रिश्ता माना जाता है, जो लगभग सही भी है। लेकिन उन्होंने सवालिया लहजे में बताया कि यदि शरीर में नमक कम हो जाए तो फिर क्या होगा, यह भी आपके ...

25 वर्षों से जरूरतमंदों के लिए साल में दो बार रक्तदान कर लोगों को प्रेरित कर रहे हैं मनोज गौर

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25 वर्षों से जरूरतमंदों के लिए साल में दो बार रक्तदान कर लोगों को प्रेरित कर रहे हैं मनोज गौर कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता गाजियाबाद। यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी, गाजियाबाद के प्रबंध निदेशक एवं वरिष्ठ समाजसेवी डॉ पी एन अरोड़ा ने मंगलवार को गौर संस ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज गौर को हॉस्पिटल में स्वैच्छिक रक्तदान करने पर हृदय से आभार व्यक्त किया। पिछले 25 वर्षों से लगातार साल में दो बार जरूरतमंदों के लिए स्वैच्छिक  रक्तदान कर रहे मनोज गौर, गौरसंस इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक होने के साथ साथ, क्रेडाई वेस्टर्न यूपी के अध्यक्ष का प्रतिष्ठित पद भी संभाल रहे हैं। वह एक बहुत ही उत्साही व्यक्ति हैं और उत्साही खिलाड़ी भी हैं। अपने युवा दिनों के दौरान उन्होंने एथलेटिक्स, क्रिकेट, हॉकी और टेबल टेनिस में अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व किया। हालाँकि, टेबल टेनिस उनका पहला पसंदीदा खेल था जिसमें उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। बचपन से ही मनोज गौर एक उत्कृष्ट छात्र थे और अभी भी एक उत्साही शिक्षार्थी हैं, क्योंकि उनका दृढ़ विश्वास है कि जीवन में हमें निरंतर सीखना है। उनके पास बड़े पै...

ओमिक्रॉन! लड़ाई जारी है: श्रीमती उपासना अरोड़ा

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ओमिक्रॉन! लड़ाई जारी है: श्रीमती उपासना अरोड़ा # विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे "वायरस ऑफ़ कंसर्न" के रूप में किया है टैग @ कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता गाजियाबाद। विश्व एक उत्परिवर्तित कोविड-19 वायरस के नए रूप, ओमीक्रोन के साथ एक नई लड़ाई का सामना कर रहा है। यह कहना है श्रीमती उपासना अरोड़ा, निदेशिका, यशोदा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, गाजियाबाद का, जिन्होंने ओमिक्रोन की चुनौतियों, दुविधा, इसके प्रभाव और रोकथाम के तरीकों के बारे में चर्चा की।  उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे "वायरस ऑफ़ कंसर्न" के रूप में टैग किया है, क्योंकि प्रारंभिक साक्ष्य इंगित करते हैं कि ओमीक्रोन, अन्य वेरिएंट की तुलना में, उन लोगों को अधिक आसानी से फिर से संक्रमित कर सकता है, जिन्हें पहले कोविड-19 संक्रमण हो चुका है। प्रारंभिक शोध में पता चला है कि इसके स्पाइक प्रोटीन में कुछ ऐसे उत्परिवर्तन होते हैं जो वायरस की संचरण क्षमता को बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। भारत में, इस लेख को लिखे जाने तक, इसकी संक्रमण संख्या 32 तक पहुंच गई है, जिसमें 9 ताजा मामले हैं, जिनमें...