ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों के 'दिल्ली-विमर्श' के निहितार्थ
ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों के 'दिल्ली-विमर्श' के निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक ब्रिक्स (BRICS) के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय दिल्ली बैठक ने दुनिया को कई महत्वपूर्ण राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक संदेश दिए हैं, जिनके कूटनीतिक निहितार्थ को समझने की जरूरत है। अन्यथा शेष दुनिया को अमेरिकी-यूरोपीय दादागिरी (नाटो सैन्य गठबंधन) के दुनियावी दांवपेंचों से निजात मिलनी मुश्किल है। लिहाजा, इस बैठक में मुख्य रूप से वैश्विक शक्ति-संतुलन, अमेरिकी प्रतिबंध नीति, पश्चिम एशिया संकट, वैश्विक व्यापार व्यवस्था और “ग्लोबल साउथ” की भूमिका पर जोर दिखाई दिया। देखा जाए तो नई दिल्ली में ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों का जमावड़ा लगा हुआ है। दो दिनों का यह 18वां शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया कई मोर्चे पर अस्थिरता से गुजर रही है। ब्रिक्स के सदस्य देश - ईरान और यूएई सीधे तौर पर इस हलचल में शामिल है। ऐसे में यह जुटान पूरी दुनिया के लिए अहम हो जाती है। इस अहम बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर, रूस के विदेश मंत्री सर्जेइ लावरोव और ईरान के विदे...