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Regular Exercise and Participation in Sports Essential for a Healthy Lifestyle: Noida Hemathon

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Regular Exercise and Participation in Sports Essential for a Healthy Lifestyle: Noida Hemathon * Hemophilia awareness program 'Noida Hemathon' organized at Noida Haat * Children with hemophilia and their family members actively participated in the Hemophilia Awareness Run @ Political World Bureau Noida: On Sunday, the Hemophilia Society, Noida, organized a hemophilia awareness program, 'Noida Hemathon,' at the local Noida Haat.  The program emphasized that regular exercise and participation in sports are essential for a healthy lifestyle.  Dr. D.K. Singh, Dean of the Post Graduate Institute of Child Health, Noida, and Guest of Honor, gave an informative presentation on non-factor replacement therapy in hemophilia. Dr. D.K. Verma, Guest of Honor from MMG Hospital, Ghaziabad, spoke about the availability of clotting factors and the challenges in procuring them. He also suggested the recruitment of a hematologist at MMG Hospital, Ghaziabad. Dr. Kris...

नियमित व्यायाम और स्पोर्ट्स में भाग लेना एक स्वस्थ्य जीवनशैली के लिए आवश्यक: नोएडा हेमाथॉन

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नियमित व्यायाम और स्पोर्ट्स में भाग लेना एक स्वस्थ्य जीवनशैली के लिए आवश्यक: नोएडा हेमाथॉन * नोएडा हाट में हीमोफीलिया जागरूकता कार्यक्रम 'नोएडा हेमाथॉन' आयोजित * हीमोफीलिया अवेयरनेस रन में हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों और उनके परिवार के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया @ राजनैतिक दुनिया ब्यूरो नोएडा। रविवार को हीमोफीलिया सोसाइटी, नोएडा ने स्थानीय नोएडा हाट में हीमोफीलिया जागरूकता कार्यक्रम 'नोएडा हेमाथॉन' का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में नियमित व्यायाम और स्पोर्ट्स में भाग लेना एक स्वस्थ्य जीवनशैली के लिए आवश्यक कदम बताया गया। इस कार्यक्रम में पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ, नोएडा के डीन  डॉ. डी.के. सिंह, गेस्ट ऑफ़ ऑनर,ने हीमोफीलिया में नॉन-फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी पर एक जानकारी से परिपूर्ण चर्चा की।  वहीं, एमएमजी हॉस्पिटल, गाजियाबाद से डॉ. डी.के. वर्मा, गेस्ट ऑफ़ ऑनर, ने फैक्टर की उपलब्धता और उसे खरीदने में आने वाली चुनौतियों के बारे में बात की। साथ ही उन्होंने एमएमजी हॉस्पिटल गाजियाबाद में हेमाटोलॉजिस्ट की भर्ती का भी सुझाव दिया। वहीं, ड...

स्वस्थ समाज के लिए निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देना आवश्यक: शुभांग अरोड़ा, कार्यकारी निदेशक, यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स,

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स्वस्थ समाज के लिए निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देना आवश्यक:  शुभांग अरोड़ा, कार्यकारी निदेशक, यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स # यशोदा मेडिसिटी ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने के लिए एडल्ट वैक्सीनेशन क्लिनिक का उद्घाटन किया # उद्घाटन के साथ वयस्क टीकाकरण के महत्व को रेखांकित किया गया, जो बीमारियों की रोकथाम और स्वस्थ जीवन को समर्थन देता है। @ कमलेश पांडेय/राजनैतिक दुनिया ब्यूरो दिल्ली-एनसीआर: दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख अस्पतालों में से एक, यशोदा मेडिसिटी ने गत शुक्रवार को अपने एडल्ट वैक्सीनेशन क्लिनिक के शुभारंभ के साथ निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। यह समर्पित केंद्र वयस्क टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और टीकाकरण सेवाओं तक व्यवस्थित पहुंच उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखता है, जिससे दीर्घकालिक रोगों की रोकथाम और समुदायों में स्वस्थ उम्र बढ़ने को समर्थन मिल सके। इस क्लिनिक का उद्घाटन उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा द्वारा किया गया। इस अवसर पर यशोदा मेडिसिटी के वरिष्ठ...

विकसित भारत 2047 का रोडमैप है युवा बजट 2026-27, विकास को रफ्तार

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विकसित भारत 2047 का रोडमैप है युवा बजट 2026-27, विकास को रफ्तार @ राजकुमार सिंह भाटी, निगम पार्षद, गाजियाबाद भारत सरकार का 2026-27 का केंद्रीय बजट अनवरत विकास, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और राजकोषीय अनुशासन पर केंद्रित है। यह युवा बजट है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूरा करता है। वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने रविवार 1 फरवरी को इसे संसद की पटल पर प्रस्तुत करके एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। यह बजट ऐतिहासिक, समावेशी और विकासोन्मुखी बजट है। इससे 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाऐं पूरी होंगी।  इससे सुधारों को मजबूती मिलेगी और विकसित भारत के सपने पूरे होंगे।  देखा जाए तो यह विकास का रोडमैप है। इसमें नारी शक्ति का सशक्त प्रतिबिंब दिखाई देता है। इसमें अपार अवसर निहित है। इसमें युवाओं के लिए नया आयाम है तो हर घर लक्ष्मी का आगमन सुनिश्चित करने वाला है। इसमें विकास पर फोकस किया गया है जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, रोजगार सृजन ज्यादा होगा और समावेशी विकास संभव होगा। कुलमिलाकर यह बजट देश को 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाएगा।  सच कहूं तो यह बजट विकसि...

विकसित भारत के लिए समर्पित है आम लोगों का युवा बजट 2026-27

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विकसित भारत के लिए समर्पित है आम लोगों का युवा बजट 2026-27 @ मनोज गोयल, भाजपा नेता व पूर्व पार्षद, नगर निगम गाजियाबाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और गाजियाबाद नगर निगम के पूर्व पार्षद मनोज गोयल ने रविवार को कहा कि 2026-27 का आम बजट प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की नीतियों और सुशासन की निरंतरता को साफ तौर पर रेखांकित करता है। यह केंद्रीय बजट को भारत को 2047 तक विकसित बनाने की दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम प्रतीत होता है।  भाजपा नेता गोयल ने बजट 2026-27 की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की अर्थव्यवस्था को निरंतर मजबूत बनाए रखने के लिए जो निर्णायक कदम उठाए हैं, उसे देश के विकास को रफ्तार मिलेगी। चूंकि जनता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भरोसा करती है, इसलिए उसकी समग्र बेहतरी के लिए लाया हुआ यह युवा बजट है, जो जनकल्याणकारी है।   पूर्व पार्षद मनोज गोयल कहा कि यह बजट हमारे लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र की प्रगति करता है, देश में उत्पादन क्षमता में वृद्धि करता...

भारत-अरब लीग के विदेश मंत्रियों की बैठक के सियासी व कूटनीतिक मायने

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भारत-अरब लीग के विदेश मंत्रियों की बैठक के सियासी व कूटनीतिक मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत की सियासत में भले ही हिन्दू-मुसलमान एक-दूसरे के विपरीत ध्रुव समझे जाते हों, लेकिन वैश्विक दुनियादारी में वे परस्पर पूरक बनते जा रहे हैं। ऐसा इसलिए कि अरब जगत पर कसते अमेरिकी-चीनी शिकंजे के दृष्टिगत पश्चिम और मध्य एशियाई देशों की भलाई इसी में निहित है कि वे सभी 22 देश भारत-रूस और यूरोपीय देशों को साध कर चलें, ताकि कोई एक महाशक्ति या उनका दूसरा प्रतिद्वंद्वी देश मनमाफिक इनका दोहन-शोषण नहीं कर पाए। यही वजह है कि कूटनीतिक विसात पर भारत का महत्व सभी देशों के लिए बढ़ता जा रहा है। अमेरिका, चीन, रूस के समानांतर भारत एक मजबूत और अविवादित कूटनीतिक हस्ती के रूप में उभरा है, जिसकी सोच में वैश्विक प्रेम और पारस्परिक सद्भाव की भावना अंतर्निहित है।  यही वजह है कि भारत की राजधानी नई दिल्ली में गत 31 जनवरी 2026 को लगभग एक दशक के अंतराल के बाद भारत-अरब लीग के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक आयोजित हुई, जो भारत-अरब संबंधों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। खासकर...

स्वस्थ समाज ही उन्नति का आधार है: पार्षद राजकुमार सिंह भाटी

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स्वस्थ समाज ही उन्नति का आधार है: पार्षद राजकुमार सिंह भाटी # समाज के स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक योगदान देना हमारी प्राथमिकता है: अजीत सिंह यादव # वार्ड नम्बर 89 (वैशाली 3) के रामप्रस्था ग्रीन्स में लगा स्वास्थ्य शिविर, 300 से अधिक निवासियों ने कराई जाँच राजनैतिक दुनिया संवाददाता वैशाली, साहिबाबाद। सामुदायिक कल्याण और बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाते हुए वैशाली के वार्ड नम्बर 89 (वैशाली 3) स्थित रामप्रस्था ग्रीन्स में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। रामप्रस्था एनएक्सटी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित इस शिविर में मैक्स हॉस्पिटल और रोटरी ब्लड बैंक का विशेष सहयोग रहा। इस ​शिविर में स्थानीय निवासियों का भारी उत्साह देखा गया, जहाँ 300 से अधिक लोगों ने अपनी सेहत की जाँच कराई और परामर्श लिया। इस स्वास्थ्य शिविर में डॉक्टरों की अनुभवी टीम ने ब्लड प्रेशर, शुगर और अन्य बीमारियों पर निःशुल्क परामर्श दिया। साथ ही, रोटरी ब्लड बैंक के सहयोग से रक्तदान के महत्व को साझा किया गया। यह शिविर रामप्रस्था एनएक्सटी के चेयरमैन अजीत सिंह यादव, एस. यादव के कुशल नेतृ...

ड्रीम बजट 2026-27: विकसित भारत के निमित्त शहरी विकास आवंटन में दृष्टिगोचर हुआ व्यापक बदलाव

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ड्रीम बजट 2026-27: विकसित भारत के निमित्त शहरी विकास आवंटन में दृष्टिगोचर हुआ व्यापक बदलाव @ अंकित जैन, सीईओ व कोफाउंडर, कोसमोस पम्पस भारत के बजट 2026-27 में शहरी विकास के लिए प्रस्तावित ₹20,000 करोड़ का आवंटन वास्तव में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह सीधे तौर पर ₹20,000 करोड़ का एकमुश्त खर्च शहरी विकास के लिए नहीं है। दरअसल, यह राशि मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्रों में कार्बन कैप्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी हो सकती है, जबकि शहरी विकास के लिए City Economic Regions (CER) पर 5 वर्षों में ₹5,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। हालांकि, इस व्यापक बदलाव का स्वरूप उल्लेखनीय है क्योंकि यह आवंटन पिछले बजटों से अलग है। चूंकि यह अब बड़े महानगरों से हटकर टियर-2 और टियर-3 शहरों (5 लाख से अधिक आबादी वाले) पर फोकस करता है, जहां बुनियादी ढांचे, पुनर्विकास और आर्थिक क्षेत्रों का विकास होगा। इससे छोटे शहरों में रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स हब और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। देखा जाए तो पिछले बजटों से तुलना में यह विशेष कदम है, क्योंकि पिछले वर्षों में शह...

जातिवाद एक वैचारिक कैंसर, इससे अंतरराष्ट्रीय नुस्खे से निबटे भारत

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जातिवाद एक वैचारिक कैंसर, इससे अंतरराष्ट्रीय नुस्खे से निबटे भारत @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत में जातिवाद को वैचारिक कैंसर कहना एक सशक्त रूपक है, जो इसकी गहरी जड़ों, फैलाव और विनाशकारी प्रभावों को दर्शाता है। दरअसल जातिवाद सामाजिक एकता को खोखला करता है और राजनीतिक-आर्थिक प्रगति में बाधा बनता है। इसलिए इसे जड़मूल से मिटाना अत्यन्त आवश्यक है। यदि अमेरिका, कनाडा, स्वीडन और सिंगापुर के सफल अनुप्रयोगों से भारतीय नेतृत्व कुछ सीख सके तो जातिवाद से भारत भी आसानी पूर्वक निबट सकता है।  देखा जाए तो भारत में जातिवाद एक राजनीतिक हथियार बन चुका है, क्योंकि राजनीतिक दल वोट बैंक के लिए जाति को भुनाते हैं, जिससे यह वैचारिक रूप से निरंतर मजबूत होता चला आया है। देखा जाता है कि दलगत उम्मीदवार चयन से लेकर नीतियां निर्धारित करने तक में दलीय हुक्मरानों के समक्ष जाति-आधारित प्राथमिकताएं बनी रहती हैं, जो समाज को क्यारियों में बांट देती हैं। इससे सामाजिक वैमनस्य बढ़ता है और राष्ट्रीय एकता कमजोर पड़ती है।  जातिवाद से सामाजिक विभाजन भी मजबूत होता है, क्योंकि जातिवाद ...

युवा बजट 2026-27 के आर्थिक मायने विशिष्ट, सियासी प्रभाव से विकसित भारत के सपने होंगे पूरे

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युवा बजट 2026-27 के आर्थिक मायने विशिष्ट, सियासी प्रभाववश विकसित भारत 2047 के सपने पूरे होंगे @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत सरकार का 2026-27 का केंद्रीय बजट विकास, रोजगार सृजन और राजकोषीय अनुशासन पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026, दिन रविवार को इसे संसद की पटल पर प्रस्तुत करके एक नया रिकॉर्ड कायम किया। लिहाजा इसके आर्थिक मायने और राजनीतिक प्रभाव महत्वपूर्ण है। इसपर बहस तेज हो गई, जो कई कारणों से अभिप्रेरित है। जहां सत्ता पक्ष ने इसे युवा शक्ति का प्रतीक बजट ठहराया, वहीं विपक्ष ने इसे अदृश्य बजट करार देते हुए जमकर आलोचना की। जहां तक कुल बजट आकार की बात है तो यह 53.5 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया। भले ही राजकोषीय घाटा जीडीपी (GDP) का 4.3% रखा गया, जो पिछले साल के 4.4% की तुलना में कुछ कम है। वहीं, जहां तक कर सुधार की बात है तो आयकर दरों में कोई बदलाव नहीं आया; जबकि नया आयकर अधिनियम 2026 अप्रैल से लागू होगा। वहीं, एफ एंड ओ (F&O) पर एसट...

भारत में सवर्ण विरोधी नीतियों को बढ़ावा देने से 'जातीय राष्ट्रवाद' को मिलेगा बल!

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भारत में सवर्ण विरोधी नीतियों को बढ़ावा देने से 'जातीय राष्ट्रवाद' को मिलेगा बल! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत में जड़ जमा चुकी जातीय सियासत से देर सबेर जातीय राष्ट्रवाद की भावना को बल मिलता प्रतीत होता है। यहां पर जिस तरह से दलित और ओबीसी नेताओं व उनके पिट्ठू बुद्धिजीवियों के द्वारा सवर्णों के खिलाफ सामाजिक विष-वमन जारी है, साहित्यिक और राजनीतिक प्रहार तेज किये जाने का प्रचलन बढ़ा है, सियासी रूप से सवर्णों को हाशिए पर धकेला जा रहा है, उनके बच्चों के लिए सरकारी शिक्षा और नौकरियों में निरंतर अवसर सीमित किये जा रहे हैं, उनको दलित-ओबीसी विरोधी कृत्य में फंसाने के लिए मजबूत कानून लाए जा रहे हैं, कतिपय दलित-ओबीसी अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से सवर्णों के खिलाफ कार्य किये जाते हैं, इन सब बातों से तो यही महसूस किया जाता है कि ऐसा सवर्ण विरोधी संवैधानिक व व्यवहारिक षड्यंत्र अपनी सारी हदें पार करता जा रहा है। लिहाजा सवर्णों की मजबूत प्रतिक्रियाएं भी स्वाभाविक हैं। यदि समय रहते भारतीय संसद और सुप्रीम कोर्ट नहीं चेता तो भारत में सवर...

अतीत के भेदभाव पर सवर्णों के वर्तमान-भविष्य से खिलवाड़ कबतक?

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अतीत में हुए भेदभाव पर सवर्णों के वर्तमान-भविष्य को कानूनी शिकंजे में कसना न्यायसंगतता का तकाजा नहीं? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अतीत के भेदभाव को आधार बनाकर सवर्ण समाज के वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों को दंडित करने या आरक्षण जैसी नीतियों से बांधना न्यायसंगतता के सिद्धांतों के विरुद्ध प्रतीत होता है, क्योंकि यह व्यक्तिगत योग्यता को नजरअंदाज कर सामूहिक दोषारोपण करता है। इसलिए यक्ष प्रश्न है कि अतीत में हुए भेदभाव पर सवर्णों के वर्तमान-भविष्य को कानूनी शिकंजे में कसना दलित-ओबीसी नेतृत्व की न्यायसंगतता का तकाजा नहीं है! लिहाजा, उन्मुक्त हृदय से उनके मौजूदा प्रगतिशील नेताओं को गहराई पूर्वक विचार करना चाहिए और अपने पूर्वजों के प्रतिगामी नजरिए को बदलकर स्वतंत्रता, समानता व बंधुत्व के राष्ट्रव्यापी लोकतांत्रिक भाव को मजबूत करना चाहिए। अन्यथा सामाजिक विघटन को परमाण्विक प्रक्रिया तेज होगी और इससे पैदा हुए जनविद्वेष की आग में देर-सबेर हरेक शांतिप्रिय लोगों के भी झुलसने का आसन्न खतरा बना रहेगा। ऐसा इसलिए कि यह नीतिगत, वैधानिक और रणनीतिक सवाल है जिसे कूटनीतिक स्व...

विकसित भारत के दृष्टिगत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मायने

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विकसित भारत के दृष्टिगत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मायने @ कमलेश पांडेय/ वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति को दर्शाता है, जिसमें वैश्विक चुनौतियों के बावजूद उच्च वृद्धि दर का अनुमान है। देखा जाए तो यह बजट 2026-27 से पहले नीतिगत दिशा तय करता है और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों पर जोर देता है। यही वजह है कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में वैसे नीतिगत सुधारों पर बल दिया गया है जो आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा दें। कहना न होगा कि ये सभी सुझाव वैश्विक चुनौतियों के बीच लचीलेपन और संरचनात्मक परिवर्तन पर केंद्रित हैं। जहां तक इस आर्थिक सर्वेक्षण की मुख्य विशेषताओं की बात है तो इस सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी वृद्धि 7.4% और जीवीए 7.3% का प्रथम अनुमान दिया गया है, जबकि एफ वाई (FY) 2027 के लिए 6.8-7.2% का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। वहीं, निजी उपभोग (जीडीपी का 61.5%) और निवेश (30%) प्रमुख चालक हैं, साथ ही मुद्रास्फीति अप्रैल-दिसंबर 2025 में औसतन 1.7% रही। जबकि राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष (FY)...

सनातन विरोधी भारतीय संविधान में संशोधन की अपेक्षाएं

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सनातन विरोधी भारतीय संविधान में संशोधन की अपेक्षाएं @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारतीय संविधान के कुछ प्रावधानों को यदि सनातन विरोधी षडयंत्र समझा जाता है तो यह अनायास नहीं है, क्योंकि इसके कई निर्माताओं का सार्वजनिक चरित्र संदिग्ध और हिंदुत्व विरोधी माना जाता रहा है। तत्कालीन नौकरशाहों, न्यायविदों, व उद्योगपतियों में भी ऐसे ही तत्वों की बहुतायत थी, जिससे आजादी के मौलिक उद्देश्य बता आजतक अधूरे हैं।  खास बात यह कि भले ही सत्तागत स्वार्थपूर्ति की गरज से तत्कालीन नेताओं ने सांप्रदायिक आधार पर हिन्दुस्तान व पाकिस्तान के विभाजन को स्वीकार कर लिया, लेकिन बाद में वोट बैंक की दृष्टि से जो नीतिगत  संवैधानिक शरारत की वह लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांत स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को मुंह चिढ़ाने वाली प्रतीत हुई। इसके लिए संविधान निर्माता डॉ भीम राव अंबेडकर और आधुनिक भारत के निर्माता जवाहरलाल नेहरू गुट पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। ऐसा इसलिए कि अंग्रेजों की फूट डालो और शासन करो वाली जातीय, क्षेत्रीय व धार्मिक नीतियों को स्वतंत्र भारत में हूबहू लागू कर दिया गया। ...

एक भारत, एक कानून' की नीतिगत कसौटी के सियासी निहितार्थ

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'एक भारत, एक कानून' की नीतिगत कसौटी के सियासी निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक विभिन्न तरह के पारस्परिक विरोधाभासों से जूझ रहे भारतीय गणतंत्र के लिए 'एक भारत, एक कानून' की अवधारणा बदलते वक्त की मांग है। इसलिए इसको सरजमीं पर उतरना बेहद जरूरी है। सवाल है कि जब एक मतदाता, एक वोट का विधान सफल हो सकता है तो फिर एक भारत, एक कानून का विधान क्यों नहीं? इस बात में कोई दो राय नहीं कि ऐसी सकारात्मक कोशिशें अंततोगत्वा समतामूलक समाज की दिशा में निर्णायक साबित हो सकते हैं।  लिहाजा यदि भारतीय संविधान के संघीय ढांचे और अन्यान्य विविधताओं को बनाए रखने वाले नानाविध प्रावधानों से 'एक देश, एक कानून' की पावन और समदर्शी सोच टकराती है तो ऐसे किसी भी टकराव को नजरअंदाज कीजिए और एक समान नागरिक संहिता (UCC) या एकसमान कानूनी व्यवस्था की दिशा में एक यथार्थपरक व्यवहारिक कदम उठाइए। इससे दलित, आदिवासी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, सवर्ण जैसे निरर्थक भेद भी मिटेंगे और राष्ट्र को अप्रत्याशित मजबूती मिलेगी। यह ठीक है कि इस राह में कई संरचनात्मक बाधाएं हैं, लेकिन राष्ट...