सबरीमाला प्रकरण: धर्म सम्मत न्याय दीजिए, अन्यथा लोकतांत्रिक तर्क-वितर्क भारी पड़ेगा!
सबरीमाला प्रकरण: धर्म सम्मत न्याय दीजिए, अन्यथा लोकतांत्रिक तर्क-वितर्क भारी पड़ेगा! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक सबरीमाला प्रकरण के बहाने भारतीय लोकतंत्र में, संसद और संविधान के दायरे में, सियासत और न्यायपालिका के मठाधीशों के नजरिए में, क्या सही है और क्या गलत? क्या जिम्मेदारी है और क्या नहीं?, यह बहस का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि स्पष्ट कार्रवाई नजर आनी चाहिए। या तो सियासतदान, संसद और विधानमंडलों में कानून स्पष्ट बनाएं या फिर सुलगते सवालों पर न्यायपालिका के न्यायाधीशगण स्वतः संज्ञान लेकर निष्पक्ष न्यायदेश देने की पहल करें, क्योंकि आम जनता का हित सर्वोपरि होना चाहिए। हालांकि, व्यवहारिक कसौटी पर ये बातें पूरी तरह से खरी नहीं उतरती हैं। इसलिए अपेक्षा है कि धर्म सम्मत न्याय दीजिए, अन्यथा लोकतांत्रिक तर्क-वितर्क भारी पड़ेगा! धर्मनिरपेक्षता की आड़ में एक शांति प्रिय धर्म के बारे में सुनवाई और दिशानिर्देश, जबकि दूसरे-तीसरे कट्टर धर्म के बारे में अपेक्षित सुनवाई पर टालमटोल ज्यादा दिन तक नहीं चलने वाला है, क्योंकि प्रबुद्ध हिंदुओं के संज्ञान में सारी ...