आखिर ईरानी धार्मिक शासन से क्या सीख सकता है हिंदुत्व पुरोधा भारत?
आखिर ईरानी धार्मिक शासन से क्या सीख सकता है हिंदुत्व पुरोधा भारत? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हिंदुत्व का प्रहरी भारत, इस्लामिक ईरानी धार्मिक शासन से कुछ रणनीतिक सबक ग्रहण कर सकता है, लेकिन भारत की 'धर्मनिरपेक्ष' संरचना को ध्यान में रखते हुए ऐसी किसी भी सोच को अमलीजामा पहनाने में पहला अड़ंगा माननीय सर्वोच्च न्यायालय ही लगाएगा! सच कहूँ तो भारत में जाति आधारित सामाजिक न्याय और धर्म आधारित अल्पसंख्यकवाद का वैधानिक बीजारोपण करके गोरे अंग्रेज तो चले गए, लेकिन भाषा आधारित क्षेत्रवाद तो काले अंग्रेजों की देन है। चूंकि इन तीनों से सम्बन्धित 'मूर्खतापूर्ण कानूनी विचार' व उससे स्थापित व्यवस्थाएं हिंदुओं के हिस्से वाले भारत में हिंदुत्व को निरंतर दीमक की तरह चाट रही हैं, जिसके सियासी दुष्प्रभाव वश राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और इसके आनुषंगिक संगठन भी अब हार्डकोर हिंदुत्व की राह से भटकते महसूस हो रहे हैं और सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और क्षेत्रीयता की छांव तलाशते फिर रहे हैं। लिहाजा, हिंदुत्व के इस नैराश्यपूर्ण मोड़ पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों...