सम्राट हैं तो संभावनाएँ हैं
सम्राट हैं तो संभावनाएँ हैं @ कमलेश पांडेय, कवि बिहार की धरती पर बदला है दौर, नई उम्मीदों का खुला है छोर। जन-जन के मन में अरमान हैं, सम्राट हैं तो संभावनाएँ हैं। सत्ता की राह नई-नई है, चुनौतियों की कतार खड़ी है। पर हौसलों के ऊँचे आसमान हैं, सम्राट हैं तो संभावनाएँ हैं। सड़क, सिंचाई, उद्योग बढ़ें, युवा सपनों के संग आगे चढ़ें। रोज़गार के खुलते द्वार महान हैं, सम्राट हैं तो संभावनाएँ हैं। अपराध पर हो सख्त प्रहार, शिक्षा-स्वास्थ्य का हो विस्तार। जनता के मन में यही अरमान हैं, सम्राट हैं तो संभावनाएँ हैं। दिल्ली-पटना का मेल बढ़े, विकास के नए अध्याय गढ़े। बदलाव के सुनहरे अभियान हैं, सम्राट हैं तो संभावनाएँ हैं। लेकिन जनता की यह पुकार, वादों से बढ़कर हो व्यवहार। परिणाम ही सबसे बड़ी पहचान हैं, सम्राट हैं तो संभावनाएँ हैं। इतिहास अभी लिखना बाकी है, सफलता की मंज़िल पाना बाकी है। भविष्य के खुले हुए मैदान हैं, सम्राट हैं तो संभावनाएँ हैं। *********************** # "राजनैतिकदुनिया डॉट ब्लॉग्स्पॉट डॉट कॉम" वैचारिक क्रांति का अग्रदूत है, इसलिए...